दिल्ली के अस्पताल बीते डेढ़ साल से काफी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। संसाधनों की कमी के चलते ये सभी अस्पताल मुसीबत से बाहर नहीं पा रहे हैं। कोरोना के अलावा अब इन अस्पतालों में फिर से बिस्तरों का संकट खड़ा हो चुका है जिसके चलते मरीजों को भर्ती करने से साफ इनकार किया जा रहा है। यह हालात दिल्ली एम्स से लेकर सफदरजंग और अन्य तमाम बड़े सरकारी अस्पतालों के हैं।
सफदरजंग अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार यहां लगभग सभी बिस्तर व्यस्त चल रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे मरीजों को तत्काल चिकित्सा देने के बाद वापस भेज दिया जा रहा है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में बिस्तरों की संख्या कम पड़ने लगी है जिसके चलते मरीजों को जमीन पर ही वार्ड में लिटाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। डॉक्टर मरीजों के तीमारदार को बिस्तर उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए कहीं दूसरे अस्पताल ले जाकर उपचार कराने की सलाह तक दे रहे हैं।
वहीं दिल्ली एम्स से मिली जानकारी के अनुसार इन दिनों कोरोना के अलावा पोस्ट कोविड, वायरल, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया सहित कई परेशानियों के चलते मरीजों का दाखिला हो रहा है जिसके चलते अस्पतालों में बिस्तरों का संकट बना हुआ है। एम्स के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर ने यहां तक कहा है कि अस्पतालों के लिए सिर्फ कोरोना महामारी से ही संघर्ष नहीं करना है बल्कि दूसरे मरीजों को लेकर भी चुनौतियां हैं।
एम्स और सफदरजंग के अलावा जीटीबी, लोकनायक और डीडीयू जैसे दिल्ली सरकार के बड़े अस्पतालों में भी यह चुनौती देखने को मिल रही है। इन अस्पतालों में ज्यादातर वायरल से ग्रस्त मरीजों का उपचार चल रहा है। चूंकि इन सभी के लक्षण कोरोना से मिलते जुलते हैं इसलिए आरटी पीसीआर जांच सबसे पहले कराई जा रही है।