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नए घर के बावजूद लोग नहीं भर रहे प्रॉपर्टी टैक्स

Mon, 12 May 2014 12:19 PM IST
विनोद डबास/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी में तीनों नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स का दायरा बढ़ाने के लिए पूरे वर्ष प्र्रचार-प्रसार पर लाखों रुपये खर्च कर दिए। इतना ही नहीं पुराने बकाया मामलों का निपटारा करने के लिए चार माह तक माफी योजना भी जारी रखी। इसके बावजूद लोगों ने प्र्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने में कोई खास रुचि नहीं ली।
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मकानों की संख्या बढ़ने के बावजूद तीनों नगर निगम को वित्त वर्ष 2013-14 में 40 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस वर्ष करीब 11 हजार संपत्ति मालिकों ने टैक्स जमा नहीं कराया।

दिल्ली में एक अनुमान के अनुसार तीस लाख से अधिक मकान हैं। वर्ष 2012-13 में 9,87,009 मकानों का टैक्स जमा किया गया था। वहीं वर्ष 2013-14 में तीनों नगर निगम के पास 9,76,078 मकानों का ही प्रॉपर्टी टैक्स जमा हुआ। इसका असर तीनों निगम के राजस्व पर भी पड़ा।
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गत वर्ष की तुलना में निगमों को करीब 40 करोड़ रुपये कम टैक्स मिला। खास बात यह है कि वर्ष 2013-14 के दौरान निगमों ने कमर्शियल श्रेणी में कई संपत्तियों के प्र्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की थी। इसके बावजूद राजस्व में बढ़ोतरी नहीं हुई।

तीनों निगम से मिले आंकड़ों के अनुसार राजस्व के मामले में सबसे अधिक नुकसान उत्तरी दिल्ली नगर निगम को हुआ है। इस बार निगम को 4762 संपत्तियों का टैक्स नहीं मिला। वहीं पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 4702 संपत्ति मालिकों ने टैक्स जमा नहीं कराया। दक्षिण दिल्ली नगर निगम को कम नुकसान हुआ। उसे गत वर्ष की अपेक्षा मात्र 1467 संपत्तियों का टैक्स कम मिला।

ऑनलाइन टैक्स जमा कराने वाले बढ़े
प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने में भले ही राजधानी निवासियों ने रुचि नहीं ली, लेकिन ऑनलाइन टैक्स जमा कराने में वे आगे रहे। गत वर्ष जहां 58 फीसदी लोगों ने टैक्स ऑनलाइन जमा कराया था, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 64 प्रतिशत पहुंच गया। दक्षिण दिल्ली नगर निगम के 71 प्रतिशत लोगों ने ऑनलाइन टैक्स जमा कराया। वहीं पूर्वी निगम में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत, जबकि उत्तरी निगम में 58 प्रतिशत रहा।
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