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Uphar Cinema Case: त्रासदी से जुड़े मामले में अंसल ब्रदर्स की मुश्किलें बढ़ीं, सजा कम करने के फैसले को चुनौती

Tue, 06 Sep 2022 02:45 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

एवीयूटी ने पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित 18 जुलाई 2022 के आदेश को चुनौती दी है, जिसने मामले में न्यायिक हिरासत में रियल एस्टेट कारोबारी अंसल ब्रदर्स की 7 साल की जेल की अवधि को जेल में काटी गई सजा के आधार पर उनकी सजा कम कर दी थी।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया नोटिस - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने उपहार त्रासदी से जुड़े मामले में दस्तावेजों से छेड़छाड़ के मामले में सुशील अंसल, गोपाल अंसल और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उपहार त्रासदी पीड़ित संघ (एवीयूटी) ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें 1997 के उपहार अग्निकांड से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ मामले में अंसल ब्रदर्स की जेल की अवधि को कम कर दिया था। इस त्रादसी में 59 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हो गए थे।

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न्यायमूर्ति आशा मेनन ने सोमवार को मामले में सभी आरोपियों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनकी सजा को बहाल रखा जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर तय की है।

दिल्ली पुलिस की और से पेश वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन सुनवाई के दौरान पेश हुए और कहा कि वे याचिका का समर्थन करते हैं और दिल्ली पुलिस भी फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी।
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एवीयूटी ने पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित 18 जुलाई 2022 के आदेश को चुनौती दी है, जिसने मामले में न्यायिक हिरासत में रियल एस्टेट कारोबारी अंसल ब्रदर्स की 7 साल की जेल की अवधि को जेल में काटी गई सजा के आधार पर उनकी सजा कम कर दी थी।

एवीयूटी की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने उच्च न्यायालय से 18 जुलाई को पारित आदेश को रद्द करने और प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई सजा को मूल अवधि से बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 8 नवंबर, 2021 के आदेश में 7 साल की सजा सुनाई।

पीड़ित संघ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा के माध्यम से कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश सजा पर कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है और आरोपी के आचरण और आपराधिक इतिहास से अनभिज्ञ है। अपने कृत्यों के माध्यम से, अभियुक्तों ने न्यायिक प्रणाली के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है और आक्षेपित निर्णय उनके द्वारा किए गए अपराधों की गंभीरता की सराहना करने में विफल रहता है।

ट्रायल कोर्ट ने दोषियों की जेल की अवधि को कम करते हुए जुर्माना बढ़ा दिया था। उनमें से प्रत्येक को साजिश, आपराधिक विश्वासघात और सबूतों के विनाश से संबंधित तीन धाराओं में जुर्माना तीन करोड़ कर दिया था। इससे पहले निचली अदालत ने अंसल बंधुओं पर प्रत्येक पर 2.25 करोड़ का जुर्माना लगाया था।

प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने अपराध की प्रकृति, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) की सजा पर आदेश के पूरे स्वर और अवधि को दंडात्मक और प्रतिशोधी बताया।

प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि दोहराव की कीमत पर यह न्यायालय समझता है कि उपहार अग्नि त्रासदी वह थी, जहां कई लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए, जिससे प्रभावित परिवार को गहरी पीड़ा, दर्द और बारहमासी दुख हुआ होगा।

उन्होंने कहा था कि यह मानवीय धारणाओं और समझ पर प्रहार करता है कि जीवित परिवार के सदस्य जो अब याची एसोसिएशन बनाकर एक साथ जुड़ गए हैं, वे नहीं चाहते कि अपराधी बच निकलें और अपने शेष में किसी भी अधिकार और स्वतंत्रता का आनंद लें। अदालत ने दोषी पीपी बत्रा, बर्खास्त दिनेश चंद्र शर्मा से भी जवाबा मांगा है।

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए यह भी कहा कि रातों रात सोचने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि वे सजा के पात्र हैं।

जेपी दत्ता की फिल्म बॉर्डर की स्क्रीनिंग के दौरान 13 जून, 1997 को उपहार सिनेमा में आग लगने के बाद भगदड़ में कम से कम 59 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। इसके बाद ट्रायल के दौरान दोषियों ने अदालती दस्तावेजों से छेड़छाड़ की थी।

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