दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस बिना अधिकार क्षेत्र के किसी भी व्यक्ति को समन जारी कर पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती। अदालत ने कहा, पुलिस अधिकारी केवल अपने अधिकार क्षेत्र में या आसपास के पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में लोगों को समन जारी कर सकती है।
अदालत ने यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से दो पत्रकारों को एक खोजी कहानी के संबंध में जारी समन को रद्द करते हुए की। दावा किया गया था कि कोविड-19 महामारी के दौरान अनाथ बच्चों को पैसे लेकर गोद के नाम पर बेचा जा रहा है। न्यायमूर्ति पूनम ए बंबा ने अपने 8 जुलाई के फैसले में कहा कि पत्रकारों को समन अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया गया हे। क्योंकि पत्रकार दिल्ली में रहते है जबकि उनका कार्यालय नोएडा में है। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 160 के अनुसार एक पुलिस अधिकारी केवल अपने अधिकार क्षेत्र में या आसपास के पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में लोगों को समन जारी कर सकती है। अदालत ने कहा उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर याचिकाकर्ता दिल्ली के निवासी हैं और उनके नोएडा, यूपी कार्यालय के पते हैं। उन्हें उपमंडल पुलिस अधिकारी, पंपोर, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर द्वारा सीआरपीसी की धारा 160 के तहत समन नहीं किया जा सकता ।
पत्रकार जमशेद आदिल खान और नितिन जैन ने 17 मार्च 2022 के समन रद्द करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने नवंबर 2021 में एक खोजी स्टोरी के आधार पर एक लेख प्रकाशित किया था। इसमें खुलासा किया गया था कि जिन बच्चों ने महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया था उन्हें पैसे के लिए बेचा जा रहा है।