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हाईकोर्ट: नौ साल से जेल में बंद एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी को मिली जमानत

Thu, 23 Dec 2021 06:06 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि उस व्यक्ति पर एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का आरोप लगाया गया है जिसमें न्यूनतम 10 साल की कैद है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के तहत आरोपी अतुल अग्रवाल को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा आरोपी पिछले नौ साल से अधिक समय तक जेल में एक विचाराधीन कैदी के रूप मे है।
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न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद ने कहा कि हालांकि मादक पदार्थों की तस्करी को कड़ी सजा के साथ रोका जाना चाहिए, लेकिन स्पीडी ट्रायल के आश्वासन के बिना व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना इसके मूल में असंवैधानिक है।

स्पीडी ट्रायल के आश्वासन के बिना व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना अनुच्छेद 21 के तहत हमारे संविधान में निहित सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, और इसलिए इसके मूल में असंवैधानिक है। ऐसे मामलों में दोषसिद्धि की घोषणा के अभाव में प्रक्रिया ही सजा बन जाती है। अदालत ने कहा नौ साल को एक छोटा समय नहीं कहा जा सकता।
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अदालत को बताया गया कि आरोपी के 2012 में गिरफ्तार किया गया था और उसके पास से कई नकली दस्तावेजों के साथ 150 किलो से अधिक केटामाइन हाइड्रोक्लोराइड बरामद किया गया था। सरकारी वकील ने कहा कि जांच के दौरान उसके परिसर से कुल 300 किलो ड्रग्स जब्त किए गए थे और ट्रायल भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मिली जमानत
अदालत ने कहा कि उस व्यक्ति पर एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का आरोप लगाया गया है जिसमें न्यूनतम 10 साल की कैद है। चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही 9 साल जेल में बिता चुका है वह सुप्रीम कोर्ट लीगल एड कमेटी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दायरे में आता है, जिसमें यह माना गया था कि जिन लोगों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है जो दंडनीय है। पांच साल जेल में बिताने पर न्यूनतम दस साल की कैद और न्यूनतम एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता पर एनडीपीएस अधिनियम की धारा 9ए, 21, 23, 25ए के तहत दंडनीय अपराध का आरोप लगाया गया है। इन अपराधों के तहत निर्धारित न्यूनतम 10 साल के कारावास का प्रावधान है। ऐसे में वह जमानत क हकदार है।
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