कोर्ट ने इस आधार पर खारिज की याचिका
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि इस स्तर पर रिकॉर्ड पर किसी भी सामग्री के अभाव में यह अदालत जांच एजेंसी (ईडी) को राजनीतिक मकसद नहीं बताएगी। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि याचिका इस स्तर पर समय से पहले है और जांच अभी भी होनी है। इस अदालत को रिमांड या गिरफ्तारी के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिलता है। अदालत ने कहा कि याचिका खारिज की जाती है।
संजय सिंह के वकील ने रखी दलीलें
अदालत ने माना कि गवाह दिनेश अरोड़ा का बयान ईडी द्वारा कानून की उचित प्रक्रिया के बाद दर्ज किया गया था। इस सवाल पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है कि क्या यह दबाव के कारण दर्ज किया गया था या बिना प्रक्रिया के। सिंह की ओर से पेश वकील ने कहा था कि ईडी ने कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना आप नेता को गिरफ्तार किया, जो देश में एक प्रतिष्ठित नेता हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में सिंह को ईडी ने न तो समन किया और न ही पूछताछ के लिए बुलाया और उन्हें सीधे 5 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने संजय सिंह की उस दलील को भी खारिज किया जिसमे उनकी तरफ से कहा गया था कि ईडी ने राजनीतिक दुर्भावना के कारण गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने कहा कि हम याचिकाकर्ता की इस दलील में अपनी कोई राय नहीं देगें क्योकि ये कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि संजय सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में उनकी याचिका पर सुनवाई का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। यह ऐसा केस नहीं है, जहां गिरफ्तारी के लिए लिखित जवाब नहीं दिया गया हो।
सरकारी गवाह दिनेश अरोड़ा के बयान से फंसे संजय सिंह
राजू ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है। इसकी गतिविधि किसी भी रूप में हो सकती है, इसके लिए यह जरूरी नही है कि आप मुख्य अपराध में शामिल हो। ईडी की ओर से यह भी कहा गया कि सरकारी गवाह दिनेश अरोड़ा ने अपने बयान में कहा है कि संजय सिंह ने ही मनीष सिसोदिया से उसकी मुलाकात कराई थी।