दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर-84 दंगा पीड़ित की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुआवजा प्रदान करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
अदालत ने कहा कि पीड़ित को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जा चुका है और वह यह साबित नहीं कर पाया कि पत्नी दंगों में घायल हुई थी।,
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंड लॉ की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि याची मेघ सिंह की पत्नी प्रकाश कौर की वर्ष 2007 में घटना से 23 वर्ष बाद मौत हुई है।
इस अवधि में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे साबित हो कि वह दंगों में घायल हुई थी। खंडपीठ ने कहा कि याची को वर्ष 85 में दो हजार रुपये मुआवजा प्रदान किया जा चुका है। वह किसी अन्य मुआवजे का हकदार नहीं है। अत: वे उसकी याचिका खारिज करते हैं।