न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वेबसाइट जनता की धार्मिक मान्यताओं और भक्ति का शिकार करके और साइट पर धन हस्तांतरित करने के लिए उन्हें धोखा देकर अभिषेक कार्यक्रम पर एकाधिकार स्थापित करने का प्रयास कर रही है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 मई तय की है।