जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बीते 6 सितंबर को हुए छात्रसंघ चुनाव के परिणाम घोषित करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनयू चुनाव समिति को मंगलवार को अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन को भी लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव परिणाम घोषित करने की अनुमति दे दी। 6 सितंबर को हुए चुनावों के बाद अदालत ने अंतिम परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगाई थी। याचिकाओं में कहा गया था कि छात्रसंघ चुनाव समिति ने चुनाव से पहले काउंसलर के पद 55 से घटाकर 46 कर दिए। इसके लिए विश्वविद्यालय की पूर्व अनुमति भी नहीं ली गई थी। यह लिंगदोह समिति की सिफारिशों का सीधा उल्लंघन है। इसके मुताबिक, हर संकाय और स्कूल का प्रतिनिधित्व छात्रसंघ में होना चाहिए। इसके मुताबिक ही काउंसलर की संख्या 55 तय की गई थी। यह छात्रसंघ के संविधान का हिस्सा था।
जेएनयू की ओर से स्थायी अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा था कि छात्रसंघ के संविधान में बदलाव या काउंसलर की संख्या घटाने पर चुनाव समिति निर्णय नहीं ले सकती थी। समिति का निर्णय लिंगदोह समिति की सिफारिशों के विरुद्ध था। इस बाबत चुनाव समिति को बार-बार निर्देश दिया गया था, लेकिन समिति ने कोई ध्यान नहीं दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा था कि मामूली गलती पर राघवेंद्र मिश्रा नामक छात्र का नामांकन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद उसने दोबारा फॉर्म भरा, लेकिन उसे भी रद्द कर दिया गया। इस मुद्दे को मिश्रा ने शिकायत कमेटी के सामने उठाया था। शिकायत कमेटी की सिफारिश को भी मानने से चुनाव समिति ने इनकार कर दिया था। यह नामांकन रद्द करने का चुनाव समिति ने कोई कारण भी नहीं बताया। मिश्रा ने जब इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी, तब उसे चुनाव लड़ने की अनुमति मिल सकी थी।