जलस्तर को बढ़ाने और जलभराव की समस्या से छुटकारा पाने को लेकर दिल्ली सरकार गंभीर है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने हफ्तेभर में दूसरी बार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ बैठक की है। दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
राजधानी के जलस्तर को बढ़ाना और जलभराव की समस्या से छुटकारा पाना दिल्ली सरकार के लिए बड़ी चुनौती हैं। मानसून आने से पहले इन चुनौतियों पर योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू कराना उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की पहली प्राथमिकता है। इसलिए उन्होंने हफ्तेभर में दूसरी बार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ बैठक की है। मंगलवार की बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अलावा दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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उपराज्यपाल ने दिल्ली में भूजल रिचार्ज, संवर्द्धन, ड्रेनेज व सिंक होल के माध्यम से पार्कों, सड़कों और अन्य इलाकों में वर्षा जल संचयन और जलजमाव की समस्या के समाधान की योजनाओं की समीक्षा की। पिछले सप्ताह ही उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर ठोस कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था। दिल्ली जल बोर्ड, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, लोक निर्माण विभाग, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद व दिल्ली विकास प्राधिकरण ने प्रजेंटेशन के माध्यम से अपनी योजनाओं से अवगत कराया।
अधिकारियों को निर्देश
अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भूजल स्तर 10 मीटर से नीचे हो, वहां जल बोर्ड द्वारा चिह्नित विभिन्न विभागों, एजेंसियों के स्वामित्व वाले करीब 800 स्थानों पर रिचार्ज पिट्स बनाए जाएं। इस काम को ऐसे विभागों को करने के लिए कहा गया, जिनका अपना अभियांत्रिकी सेटअप है। ऐसे विभाग इसे लागू करेंगे और बाकी काम जल बोर्ड द्वारा किया जाएगा। राजधानी में विभिन्न जगहों पर बंद और बेकार ट्यूबवेलों को वाटर रिचार्जिंग व रिटेंशन पिट्स में परिवर्तित कर उनका इस्तेमाल जल संचयन के लिए करने को कहा गया। करीब 700 चिह्नित जलाशयों, तालाबों की सफाई कर उन्हें दो मीटर गहरा करने, उनके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने के भी निर्देश दिए गए।
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उपराज्यपाल ने मांगा ब्योरा
उपराज्यपाल ने पिछली बैठक में नजफगढ़ नाले के ड्रेजिंग, जलकुंभी हटाने और किनारे पर पेड़ लगाने के निर्देशों का अधिकारियों से ब्योरा मांगा। उन्हें बताया गया कि जल कुंभी को नाले में खत्म करने की योजना है। मोटराइज्ड कटर से लैस नाव उपलब्ध कराई गई हैं। रोटर मशीनों से लैस जेसीबी मशीनों का प्रयोग कर नाले की सतह पर जमे मिट्टी और गाद को निकालकर चार मीटर की गहराई प्राप्त करने की योजना है। बारिश शुरू होते ही नाले के किनारों पर पेड़ लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह भी बताया गया कि ढांसा से छावला के बीच के 17 किमी लंबे हिस्से में ड्रेजिंग व जल कुंभी श्रेडिंग का कार्य इसी सप्ताह शुरू कर दिया जाएगा।