बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त ब्रिजेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पिछले दिनों नई बस्ती नरेला निवासी हिमांशु गोयल ने चीनी एप से जबरन वसूली की शिकायत दी थी। पीड़ित ने बताया कि एक दिन फेसबुक पर उसने एक लोन एप का विज्ञापन देखा। एप में बेहद कम ब्याज दरों पर लोन देने की बात की जा रही थी। पीड़ित ने एप डाउनलोड किया। उसमें उसे 50 हजार रुपये लोन देने की बात की गई। एप डाउनलोड करते समय उससे उसके मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट और फोटो व वीडियो गैलरी एक्सेस की अनुमति मांगी गई, जिसे हिमांशु ने ओके कर दिया।
इसके बाद उसे महज 6,870 रुपये का ही लोन मिला। लोन लेने के बाद जैसे हिमांशु की आफत ही आ गई। उसकी फोटो गैलरी में सेंध लगातर आरोपियों ने उसके परिवार के फोटो छेड़छाड़ कर उसे भेज दिए। इनको सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर उससे वसूली शुरू कर दी गई। पीड़ित से धीरे-धीरे एक लाख रुपये वसूल लिए गए।
इस घटना की वजह से हिमांशु और उसका पूरा परिवार परेशान हो गया। पुलिस ने हिमांशु की शिकायत पर मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। पता चला कि हिमांशु से वसूली की कॉल द्वारका इलाके से हो रही थीं। द्वारका के रामपाल चौक के पास रैकी की गई। वहां एक बिल्डिंग की तीन मंजिलों पर बड़ा कॉल सेंटर चल रहा था।
पुलिस की टीम ने वहां छापा मारा। यहां फ्लाई हाई ग्लोबल सर्विस एंड टेक्नोलॉजी के नाम से कॉल सेंटर मौजूद था। यहां 150 से ज्यादा लोग काम कर रहे थे। पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर के तीन टीम लीडर कनन, अवनीश और आलोक शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कॉल सेंटर के मालिक व सरगना अनिल कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया। कॉल सेंटर में मौजूद 134 महिलाओं और 15 पुरुषों को पूछताछ में शामिल होने का नोटिस दिया गया।
चीन में बैठे दो नागरिक करवा रहे थे लोन एप के जरिये वसूली...
पुलिस की पूछताछ में सरगना अनिल ने बताया कि वह एसओएल से ग्रेजुएशन कर रहा है। शुरुआत में उसने वसंत विहार के एक कॉल सेंटर में काम किया। कॉल सेंटर के अलावा कई अन्य दफ्तरों में काम किया। इस दौरान दो चीनी नागरिक एल्बर्ट और मिस्टर ट्री ने उससे संपर्क किया। दोनों के कहने पर अनिल ने द्वारका सेक्टर-7 में एक कॉल सेंटर खोलकर वहां 150 से ज्यादा महिलाओं व पुरुषों को नौकरी पर रख दिया। चीनी नागरिकों द्वारा उपलब्ध कराए गए एप का सोशल मीडिया के जरिए प्रचार किया जाता था। इसके बाद जो लोग इनके जाल में फंस जाते तो उनसे वसूली कर रकम को अपना कमीशन रखकर चीन भेज दिया जाता था।
ऐसे की जाती थी ठगी...
फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉम पर एप का विज्ञापन किया जाता था। यहां बेहद कम ब्याज पर लोन देने के नाम पर लोगों को जाल में फांसा जाता था। एक बार जब लोग एप को डाउनलोड करते थे तो उनके कांटेक्ट लिस्ट और फोटो गैलरी को एक्सेस करने के लिए अनुमति मांगी जाती थी। अनुमति दिए बगैर लोन का एप आगे बढ़ता ही नहीं था। मजबूरन अनुमति देनी ही पड़ती थी।
लोन के लिए एप्लाई करने पर बहुत कम लोन दिया जाता था। इसके बाद एक टीम पीड़ित के मोबाइल में मौजूद परिवार के फोटो से छेड़छाड़ कर उनको अश्लील बना देते थे। बाद में इनको सोशल मीडिया और कांटेक्ट में मौजूद लोगों को भेजने की धमकी देकर वसूली की जाती थी। गैंग इसी तरह हजारों लोगों से करोड़ों रुपये चीन भेज चुके हैं। पुलिस इनके बैंक खातों की जांच कर रही है।