डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान
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साहब डॉक्टरों की हड़ताल चल रही है। सुरक्षा गार्ड अस्पतालों में घुसने तक नहीं दे रहे हैं। सुबह छह बजे अपने घर से निकला था तब से लेकर अब दोपहर के दो बजे हैं लेकिन मेरे भाई को इलाज नहीं मिल रहा है। आप खुद देखिए साहब, इसके शरीर में कैसे सूजन बढ़ रही है? हाथ और पैरों में सूजन बढ़ गई है और पेट में भी दर्द है। लोकनायक अस्पताल में मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है। पहले यहां ओपीडी में पहुंचा तो वहां से वापस कर दिया, फिर इमरजेंसी में गया तो वहां भी कोई पूछने वाला नहीं है। सीमापुरी से यहां तक आकर भी इलाज नहीं मिल रहा है। मुझे समझ में ही नहीं आ रहा है, अब क्या करूं साहब, अपने मरीज को मार दूं क्या? डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों का क्या मतलब है? हमें क्यों परेशान किया जा रहा है।
यह कहानी सीमापुरी निवासी अमजद की है जो अपने 22 वर्षीय भाई सहजाद को लेकर लोकनायक अस्पताल पहुंचे थे। सुबह से दोपहर तक अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद भी जब इलाज नहीं मिला तो वह जीबी पंत, फिर जीटीबी तक पहुंचे लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई जिसके चलते उन्हें मरीज को लेकर वापस घर लौटना पड़ा।
ठीक इसी तरह की कहानी घोंडा से जीटीबी अस्पताल पहुंचे नंदन ने बयां की। अस्पताल के बाहर जमीन पर बैठे नंदन के एक पैर में फ्रैक्चर है। वहीं सही से चल भी नहीं पा रहे हैं। हड़ताल की वजह से उनके पैर का ऑपरेशन नहीं हुआ है।
इनके अलावा लोनी से जीटीबी अस्पताल पहुंचे 64 वर्षीय देव प्रकाश के शरीर में दर्द, कमजोरी और सूजन की वजह से परिजन यहां लेकर आए लेकिन इलाज नहीं मिला। पास में ही स्वामी दयानंद अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां भी इलाज नहीं मिला।
फिर किसी ऑटो चालक से पास में ही राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बारे में पता चला लेकिन वहां भी उन्हें उपचार नहीं मिला। सभी जगह डॉक्टरों की हड़ताल है और ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक ठप्प पड़ी हैं।