देश की राजधानी दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच स्वामी दयानंद अस्पताल में इससे निपटने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि, 'हमारे अस्पताल में 50 प्रतिशत मरीज डेंगू के हैं। हमने 100 बेड का डेंगू वार्ड बनाया था और अभी डेंगू के 99 मरीज भर्ती है।'
सफदरजंग अस्पताल का हाल भी बेहाल
सफदरजंग अस्पताल में हाल ऐसे, जैसे किसी जिला सरकारी अस्पताल में आ गए हों। गैलरी का फर्श मरीजों के लिए बिस्तर बना हुआ था। यहां जमीन पर पीड़ित के साथ उसके तीमारदार भी दीवार का सहारा लेकर बैठे थे। उसी वक्त स्ट्रेचर की लंबी लाइनें भी नजर आईं। पूछने पर पता चला कि दोनों छोर पर मरीज और तीमारदार होने की वजह से यह वार्ड तक नहीं पहुंच सकती हैं।
डॉक्टर ही बाहर आकर एक-एक स्ट्रेचर पर जाकर इलाज की भागम-भाग करते दिखाई दे रहे थे। डॉक्टर से भी कुछ पूछ पाते, उससे पहले ही वह बोला- ‘यहां स्थिति ठीक नहीं है, अंदर एक भी बेड नहीं है। मैं दवा लिख देता हूं। फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। आप चाहें तो घर जाकर भी यह दवाएं ले सकते हैं।’
महामारी के बाद फिर संकट में योद्धा
अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि महामारी के बाद फिर से योद्धा (स्वास्थ्य कर्मचारी) संकट में आ गए हैं। मौसमी बीमारियों की वजह से बुखार फैल रहा है। अभी कोरोना का तनाव कम भी नहीं हुआ है और फिर से स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ पड़ गया है। उन्हें पिछले तीन सप्ताह से एक दिन की छुट्टी नहीं मिली है। शनिवार और रविवार को उन्हें लगातार 48 घंटे तक काम करना पड़ रहा है।
दूसरे अस्पतालों में लैब पर बोझ, दो शिफ्ट भी कम
सफदरजंग के अलावा एम्स, आरएमएल, लोकनायक अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में लैब को लेकर जब हालात पता किए तो जानकारी मिली कि यहां दो शिफ्ट भी कम पड़ रही हैं और जांच के सैंपल की संख्या भी तेजी से बढ़ गई। कोरोना और डेंगू के बीच लक्षण एक जैसे हैं, लेकिन हर मरीज को संदिग्ध मानते हुए सैंपल लेकर जांच जरूर कराई जा रही है। इसकी वजह से इन अस्पतालों के माइक्रो बायोलॉजी विभाग पर काफी दबाव है।