दिल्ली विधानसभा गुरुवार को एक विशेष घटना की गवाह बन गई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा के पटल पर तीनों कृषि कानूनों की कॉपियां फाड़ दीं। इसके बाद विधानसभा सदस्यों ने 'जय जवान, जय किसान' के नारे लगाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलाम भारत में भी शहीद भगत सिंह के पिता और चाचा ने इसी तरह से अंग्रेज सरकार को तीन विवादित कानूनों को नौ माह के आंदोलन के बाद वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया था। लेकिन अब आजाद भारत में भी किसानों को इस तरह के आंदोलन करने पड़ रहे हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं, भाजपा ने मुख्यमंत्री के कृत्य को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि कृषि कानूनों पर आम आदमी पार्टी 'दोहरा रवैया' अपना रही है। पार्टी प्रवक्ता नवीन कुमार जिंदल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भारत के संविधान का अपमान किया है। एक मुख्यमंत्री जो पहले 23 नवंबर को इन्हीं कृषि कानूनों को प्रदेश में लागू करते हैं, वही 17 दिसंबर को सदन के पटल पर इसकी कॉपी फाड़ते हैं। इससे पूरी दुनिया में भारत के लोकतंत्र का मजाक उड़ा है। उन्हें सस्ती लोकप्रियता से बचना चाहिए और अपने संवैधानिक दायित्व को समझना चाहिए।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले अपनी दिल्ली की तरफ ध्यान देना चाहिए जहां भाजपा की महिला नेता धरने पर बैठी हुई हैं और किसानों से सहानुभूति जताने वाले मुख्यमंत्री को उनसे मिलने तक का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सत्र दिल्ली नगर निगमों में हुए कथित तौर पर भ्रष्टाचार पर चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के नेताओं-विधायकों के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार पर चुप्पी क्यों साध रखी है।