कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 21 दिनों से गाजीपुर बार्डर पर चल रहा किसान आंदोलन बुधवार को दो गुटों में बट गया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (बलराज) ने अलग मंच बनाकर अपना विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि दोनों ही संगठन के अध्यक्षों ने अलग मंच बनाकर विरोध करने पर खुलकर कुछ नहीं बोला, लेकिन उनके समर्थक किसानों का कहना था कि सरकार वीएम सिंह व बलराज भाटी को आंदोलन में नजरअंदाज किया जा रहा है। किसान आंदोलन के दौरान होने वाली बैठकों में दोनों को पूछा नहीं जाता है। इसकी वजह से दोनों ने खुद को बाकी किसान संगठन से अलग कर लिया है। हालांकि किसान आंदोलन पर दोनों ही गुटों की राय लगभग एक ही है। वीएम सिंह व बलराज भाटी दोनों ही किसान नेता केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
गाजीपुर एनएच-9 पर बने मुख्य मंच के पीछे ही दोपहर बाद राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह और भारतीय किसान यूनियन (बलराज) बलराज भाटी ने अपना अलग मंच बना लिया। दोनों संगठनों के लोगों ने बताया कि लगातार उनके नेता आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन उनको जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके संगठन भी सरकार तक अपनी बात पहुंचाने में सक्षम हैं। वहीं मामले पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कुछ भी बोलने से परहेज किया। उनका कहना था कि वह कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए धरने पर बैठे हुए हैं। कोर्ट के आदेश पर जो कमेटी बनाई जाएगी, वहां भी वह अपनी बात रखकर कृषि कानूनों को वापस लेने की ही बात रखेंगे। अपनी बात रखने का हमारा पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मसले के बीच में आया है तो जरूर कोई न कोई हल निकलेगा।
हमारा आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है। आगे भी आंदोलन शांतिपूवर्क ही चलेगा। बृहस्पतिवार को 84 खातों की पंचायत को बुलाया गया है। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। पंचायत में उत्तर-प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड के किसान हिस्सा लेंगे। जहां तक कमेटी से बातचीत की बात है, वहां पर भी हमारा स्टैंड तीनों कानूनों को वापस लेने का ही रहेगा। बाकी कोर्ट जो फैसला करेगा, उसे सबको मानना होगा।
शाम के समय नौजवान किसानों ने बैरिकेड तोड़ने का किया प्रयास...
पिछले कुछ दिनों से गाजीपुर बार्डर पर किसानों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है। नौजवान किसान जगह-जगह नारेबाजी करते हुए घूम रहे हैं। कुछ समूह बनाकर बाइक व ट्रैक्टर पर घूमते रहते हैं। बुधवार शाम करीब चार बजे कुछ युवा किसानों का एक समूह दिल्ली ओर सीमा पर लगाए गए बैरिकेड पर चढ़ गए और उनको तोड़ने का प्रयास किया। हंगामे की आशंका को देखते ही सुरक्षा बल अलर्ट हो गए। बाकी बुजुर्ग किसान सभी को समझा-बुझाकर अपने साथ वापस ले गए। दिल्ली की सीमा पर आरएएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ और एसएसबी के अलावा दिल्ली पुलिस को तैनात किया हुआ है।
विजय दिवस के मौके पर पूर्व सैनिकों का समूह पहुंचा गाजीपुर बार्डर...
किसानों के बच्चे देश की सीमा पर डटे हुए हैं और उनके माता-पिता इन काले कानून को वापस लेने के लिए अपनी ही सरकार से कड़कड़ाती हुई ठंड में जंग लड़ रहे हैं। सरकार को तुरंत किसानों की मांगे मानकर तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लेना चाहिए...। गाजीपुर बार्डर पर विजय दिवस के मौके पर किसानों का साथ देने के लिए कई पूर्व सैनिक यहां पहुंचे। सूबेदार (पूर्व) बीर सिंह चौहान ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार अपने व्यापारी मित्रों का फायदा पहुंचाने के लिए यह सब कर रही है। देश जब कोरोना से लड़ रही थी, उस समय सरकार ने चुपचाप अध्यादेश लाकर तीनों कानून पारित कर दिए। शायद तीनों ही कानून उद्योगपतियों के इशारे पर बनाए गए हैं। सरकार ने अब कानून बनाए हैं, जबकि इन उद्योगपतियों ने बड़े-बड़े गोदाम पहले से ही बनाए हुए हैं। पूर्व सैनिक जेपी मिश्रा ने कहा सरकार ने किसानों के सामने उनके ही बच्चों को खड़ा कर दिया। पुलिस या अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी तो किसानों के ही बच्चे हैं। हम उनसे अपील करेंगे कि वह किसानों पर डंडे न चलाएं बल्कि यह भी अपने तरीकों से इन कानूनों का विरोध करें।