केंद्र की वायु मानक संस्था सफर इंडिया के मुताबिक, दीपावली के अवसर पर हुई आतिशाबजी का खास असर हवा की गुणवत्ता पर नहीं पड़ा है। मध्यम रफ्तार से हवा चलने की वजह से प्रदूषक नहीं जमे हैं। बीते 24 घंटे में 2.5 माइक्रोमीटर से बड़े कणों की पीएम 10 में पांच से छह फीसदी हिस्सेदारी रही है। पीएम 10 का स्तर 291 व पीएम 2.5 का स्तर 184 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। अभी पराली के धुएं की प्रदूषण में मामूली हिस्सेदारी दर्ज हो रही है। सफर का पूर्वानुमान है कि अगले तीन दिनों तक हवा की गुणवत्ता में अधिक बदलाव की संभावना नहीं है। ऐसे में हवा की गुणवत्ता खराब से लेकर बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी।
उधर, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) का कहना है कि मगंलवार हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम थी। इसकी चाल आठ से 16 किलोमीटर प्रतिघंटा तक दर्ज की गई। मानक एक किमी की जगह मिक्सिंग हाइट 1700 मीटर रही। जबकि वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से दो गुना से भी ज्यादा 14,500 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड तक रिकार्ड किया गया। नतीजन, दिल्ली की हवाओं में प्रदूषकों को जमने का मौका नहीं मिला।
हवा की चाल होगी कम
आईआईटीएम का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में हवा की दिशा उत्तर-पूर्वी और रफ्तार घटकर पांच किलोमीटर प्रतिघंटा तक दर्ज की जा सकती है। वहीं, मिक्सिंग हाइट का स्तर 1500 मीटर और वेंटिलेशन इंडेक्स पांच हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रह सकता है। इसके अगले दिन भी हवा की रफ्तार कम रहेगी व मिक्सिंग हाइट घटकर 1400 मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स 2500 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड दर्ज किए जाने का पूर्वानुमान है।
दीपावली के अगले दिन तीन बार गंभीर रही हवा की गुणवत्ता सीपीसीबी के दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, दीपावली के अगले बीते सात सालों में तीन बार हवा की गुणवत्ता गंभीर दर्ज की गई है। सबसे खराब हवा साल 2016 में रही थी। इस साल 30 अक्तूबर की दीपावली थी। ऐसे में आतिशबाजी होने और मौसमी दशाओं का साथ न देने की वजह से अगले दिन हवा का सूचकांक 445 एक्यूआई के साथ गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया था। वहीं, साल 2017 में 19 अक्तूबर को दीपावली थी और 20 अक्तूबर को सूचकांक 403 रहा था। इसी तरह साल 2020 में 14 नवंबर को दीपावली मनाई गई थी और इसके अगले दिन 435 एक्यूआई दर्ज किया गया था।
प्रतिबंध के बावजूद जमकर हुई आतिशबाजी
दिल्ली सरकार ने राजधानी में किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री, उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था। साथ ही इस साल पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद दीपावली की रात लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। नतीजन, पटाखों से निकलने वाले सल्फर, एल्म्यूनियम व कार्बन जैसे खतरनाक रसायनों के हवा में घुलने की वजह से दीपावली की आधी रात तक हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया था। मंगलवार सुबह मध्यम रफ्तार से हवा चलने और मौसम साफ रहने की वजह से एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में दर्ज हुआ। बीते वर्ष के मुकाबले इस बार दीपावली के अवसर पर आग लगने की कुल भी अधिक मिली हैं, जिनकी संख्या 201 हैं, जबकि बीते वर्ष इनकी संख्या 184 थी।
एनसीआर में गुरुग्राम की हवा रही सबसे खराब
दीपावली के अगले दिन एनसीआर के शहरों की हवाओं पर भी अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है। फरीदाबाद, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की हवा खराब श्रेणी में रही है, जबकि नोएडा की हवा बेहद खराब रही है। वहीं, गुरुग्राम की हवा 322 एक्यूआई के साथ सबसे खराब दर्ज की गई है।