दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक बिल्डर के प्लॉट के जाली दस्तावेज बनाकर उसे बेचने वाले आरोपी को ऋषिकेश से गिरफ्तार किया है। चार दिन पहले पुलिस ने उसके साथी को गिरफ्तार किया था। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गए थे। आरोपी को अदालत ने इस मामले में भगोड़ा करार दिया था।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर के सिंह ने बताया कि आरोपी की पहचान पशुलोक विस्थापित कालोनी ऋषिकेश निवासी पुष्पेंद्र(34) के रूप में हुई है। वर्ष 2017 में मेसर्स कैपिटल लैंड एंड बिल्डरर्स प्राइवेट लिमिटेड ने शाखा में फर्जीवाड़ा की शिकायत की।
शिकायत में कंपनी ने बताया कि कंपनी ने लोनी रोड शाहदरा दिल्ली में कैलाश नगर कालोनी नाम से एक आवासीय कालोनी विकसित की। कंपनी ने पूरे क्षेत्र को 81 बीघा और 14 बिस्वास को विभिन्न आकारों के कई भूखंडों में विभाजित कर दिया।
कंपनी को पता चला कि पुष्पेंद्र नाम का आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर कंपनी के प्लॉट का जाली दस्तावेज बनाकर उसे लोगों को बेच दिया है। इस बाबत आरोपी के खिलाफ 17 शिकायत दर्ज करवाई गई। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई। शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पुष्पेंद्र ने मालिकाना हक की एक जाली श्रृंखला बनाई और इसके आधार पर उसने धोखाधड़ी कर कैलाश कालोनी के प्लॉट को बेच दिया। पुलिस ने आरोपी पुष्पेंद्र की तलाश में दिल्ली के अलावा उत्तराखंड में दबिश दी। लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला।
वर्ष 2020 में अदालत ने इस मामले में आरोपी को भगोड़ा करार दिया। इसी बीच 26 जुलाई को पुलिस को पुष्पेंद्र के एक सहयोगी दर्शी सिंह के हरिद्वार में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने वहां दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ में मुख्य आरोपी पुष्पेंद्र के ऋषिकेश में छुपे होने की जानकारी मिली।
30 जुलाई को पुलिस ने आरोपी को ऋषिकेश से गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि पुष्पेंद्र काफी अरसे से कैलाश कालोनी में रहता था। उसे वहां की संपति के बारे में जानकारी दी। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर संपति का जाली दस्तावेज बनाया और उसे लोगों को बेच दिया।