लुक्सर जेल से छूटने के बाद उसके परिजन अपने साथ शहर से बाहर ले गए। नोएडा के निठारी गांव में स्थित डी-5 कोठी के पास कंकाल और कोठी के अंदर से कपड़े, खिलौने, चप्पल आदि मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत से पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई थी। प्रयागराज उच्च न्यायालय ने उसे रिहा कर दिया। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। नोएडा के सबसे चर्चित निठारी कांड के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए डीडीआरडब्ल्यूए ने कदम आगे बढ़ाए हैं, जिससे पीड़ितों को एक बार फिर से न्याय की उम्मीद जगी है।
निठारी कांड पर एक नजर
नोएडा के सबसे चर्चित और सनसनी फैलाने वाला निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। जब मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों समेत एक युवती के कंकाल मिले थे। पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था। गाजियाबाद की सीबीआई अदालत में सुरेंद्र कोली को 12 मामलों और मोनिंदर सिंह पंढेर को दो मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इस साल 16 अक्टूबर को प्रयागराज उच्च न्यायालय ने पंढेर को दो मामलों में बरी कर दिया। उसके नौकर सुरेंद्र कोली को भी 14 मामलों में बरी कर दिया गया। कोली अभी दो मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
आरोपी के लिए फांसी की सजा भी कम
निठारी कांड में अपनी 10 वर्षीय बेटी ज्योति को खोने वाली मां सुनीता का कहना है कि आरोपी ने जिस निमर्मता से उनकी बेटी की हत्या की है। उसके लिए उसे फांसी की सजा मिले तो भी कब होगी। उसने कई घरों के चिराग को बुझा दिया। कई मां की कोख सूनी कर दी। उन्होंने पीएम व प्रदेश के सीएम से भी इस मामले में सहयाेग करते हुए फांसी की सजा दिलाने की मांग की है।