विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी अस्थमा, फेफड़े और दिल की रोगी में कई तरह की दिक्कत रहती है। प्रदूषण बढ़ने पर समस्या कई गुना तक बढ़ जाती है। भ्रूण अपनी जरूरत के आधार पर ऑक्सीजन व अन्य तत्व की पूर्ति मां के शरीर से करता है। यदि मां के शरीर में रोग गंभीर होता है तो पोषक तत्व की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है। प्रदूषण का असर सामान्य गर्भवती महिला में भी होता है। हालांकि इसकी सटीक जानकारी के लिए व्यापक स्तर पर अध्ययन की जरूरत है।
सांस के मरीजों में हो सकती है दिक्कत
एम्स में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख व प्रोफेसर डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि प्रदूषण का सीधा असर गर्भवती महिला पर पड़ता है यह कहना मुश्किल है। लेकिन सांस व दिल के मरीजों पर इसका प्रभाव ज्यादा होता है। इन मरीजों के गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है। प्रदूषण को लेकर यह मानना है कि यह हार्मोनल बदलाव करता है। प्रदूषण सीधे भ्रूण तक नहीं पहुंच पाता। भ्रूण खुद को पहले ही सुरक्षित कर लेता है, यदि मां में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिरता है तो कुछ दिक्कत हो सकती है। हालांकि प्रदूषण से होने वाले नुकसान हो लेकर बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है। इस अध्ययन की मदद से ही प्रदूषण के प्रभाव की सटीक जानकारी हासिल हो सकेंगी।
धूम्रपान व प्रदूषण में अंतर
गर्भवती महिलाओं में धूम्रपान से होने वाले नुकसान और प्रदूषण का असर में अंतर है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान में निकोटिन की मात्रा रहती है। जो सामान्य गर्भवती महिला को भी नुकसान पहुंचाता है। जबकि प्रदूषण में स्मॉग रहता है। इसके अलावा इसमें लैड, कार्बन मोनो ऑक्साइड सहित अन्य जहरीली गैस होती है। ऐसे में प्रदूषण का सामान्य गर्भवती महिला व उनके पेट में पल रहे भ्रूण पर कितना असर हो सकता है यह अध्ययन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसे लेकर जल्द ही एम्स सहित देश के बड़े अस्पताल अध्ययन शुरू कर सकते हैं। दिल्ली एनसीआर में पिछले कुछ सालों से लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
अस्पताल में 10 फीसदी तक बढ़े मरीज
सफदरजंग अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. दिव्या ने बताया कि मौसम में बदलाव के बाद से प्रदूषण के साथ वायरल और मच्छर जनित बीमारी से पीड़ित गर्भवती मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जो गर्भवती पहले से सांस की समस्या से परेशान थे उनमें प्रदूषण ने समस्या को काफी बढ़ा दिया। ऐसे मरीजों को इस दौरान विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत होती है। गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से साफ व स्वच्छ वातावरण में रहने की जरूरत है।