होली के त्योहार में शरीक होने वालों का बड़ा जत्था ट्रेन से पूर्वांचल दिशा की तरफ रवाना हुआ। जिसे जहां जगह मिल रहा था वहीं बैठने के प्रयास में दिखा। नई दिल्ली स्टेशन, आनंद विहार स्टेशन पर सोमवार की सुबह से ही भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी। ट्रेन का इंतजार कर रहे लोग ट्रेन के प्लेटफार्म पर पहुंचते ही उसमें चढ़ने के लिए जद्दोजहद करते दिखें।
स्लीपर कोच में तो इतनी भीड़ नजर आई कि लोग शौचालय के गेट पर ही सामान रखकर यात्रा करने को मजबूर थे। ट्रेन में चढ़ने की आपाधापी ऐसी है कि पल-पल पर दुर्घटना की संभावना बन रही थी। हालांकि प्रशासन इसे लेकर चुस्त दिखा। जबतक यात्री ट्रेन में पूरे तरीके से चढ़ नहीं जा रहे थे तब तक ट्रेन नहीं चली।
ट्रेन की रवानगी के एक घंटे पहले ही प्लेटफार्म पर ट्रेन लगा दी जा रही है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे ही संपर्क क्रांति प्लेटफार्म नंबर 16 पर पहुंची। यात्री किसी तरह ट्रेन में जगह पाने की जद्दोजेहद में दिखें। इसी तरह वैशाली, पूर्वा, सप्तक्रांति, सत्याग्रह समेत कई ट्रेनों आरक्षित टिकट के बावजूद ट्रेन में आरक्षित टिकट के बावजूद चढ़ना मुश्किल साबित हो रहा है। अनारक्षित कोच की बात करें तो यात्रियों की संख्या के सामने सीट काफी कम थी। लिहाजा ट्रेन के प्लेटफार्म से छूटने के दौरान भी यात्रियों की कोशिश थी कि किसी तरह ट्रेन में चढ़ जाए।
टिकट खिड़की से ट्रेन में बैठने तक मारामारी
होली पर घर जाने की तमन्ना इस कदर लोगों पर हावी है कि दोपहर को रवाना होने वाली ट्रेन से यात्रा करने के लिए सुबह से ही लंबी लंबी कतारें स्टेशन परिसर के बाहर लग जाती है। आनंद विहार से सबसे अधिक पूर्वांचल की ट्रेन रवाना होती है लिहाजा यहां भीड़ देखते ही बन रही थी। ट्रेन की रवानगी के चार घंटे पहले से ही मुसाफिर प्लेटफार्म तक पहुंचने की कोशिश में रह रहे थे। इसी तरह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन संपर्क क्रांति, वैशाली समेत अन्य ट्रेन से यात्रा करने के लिए सुबह 11 बजे से ही कतार लगी हुई थी।
जूझ कर यात्रा करने की मजबूरी
होली में शरीक होने की बेचैनी इस कदर यात्रियों पर हावी दिखी कि यात्री ट्रेन के प्लेटफार्म पर पहुंचते ही जान को जोखिम में डालकर ट्रेन में प्रवेश का प्रयास करते दिखें। दरअसल अनारक्षित कोच की कमी के कारण ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंचते ही उसमें सवार होने के लिए आपाधापी मच जाती है। अतिरिक्त कोच तो ट्रेनों में जोड़े गए है, लेकिन अनारक्षित कोच की संख्या घट रही है। वातानुकूलित कोच का भी बुरा हाल है। इस कोच में भी खड़े होकर यात्रा करने की लोगों की मजबूरी है। कुल मिलाकर पूरे दिन टिकट खिड़की से लेकर ट्रेन में बैठने तक आपाधापी रहीं। यात्रियों को शाम की ट्रेन के लिए सुबह से ही टिकट खिड़की पर लाइन में लगकर टिकट लेने पर मजबूर होना पड़ा।