गुड़गांव के मेवात जिले में शिक्षा व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। जिले की करीब 12 लाख की आबादी पर 39 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में से 30 प्राचार्य पद खाली, 41 हाई स्कूल में से 30 हेडमास्टर के पद खाली, 342 मिडिल स्कूलों में से 219 हेडमास्टर और प्राइमरी के 441 में से 105 हेडमास्टरों के पद खाली पडे़ हैं। इतना ही नहीं जिले के पांच खंड पुन्हाना, नूंह, नगीना, फिरोजपुर झिरका और तावडू में एक भी खण्ड मौलिक शिक्षा अधिकारी नहीं हैं। पांच खंड शिक्षा अधिकारियों में से तीन पद खाली हैं। ऐसे में सवाल उठता है मेवात जिले में केंद्र सरकार के बेटियों को बचाने और पढ़ाने का अभियान कैसे सफल हो सकता है।
पिछली कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2007 में करीब 190 प्राइमरी स्कूलों को अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बनाया था, इन स्कूलों में आज तक एक भी स्थायी अध्यापक नियुक्त नहीं कि या गया है। मेवात के कुल 2 लाख 22 हजार 376 बच्चों पर कुल 6682 अध्यापकों के मंजूर पद हैं। इनमें से 3717 कार्यरत हैं, जबकी 2965 पद खाली हैं।
इसके अलावा गांव बादली निवासी मोहम्मद रिजवान ने बताया कि उनके गांव के मिडिल स्कूल में सात सौ बच्चे जिनको पढ़ाने के लिए केवल दो ही गेस्ट अध्यापक हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सात सौ बच्चों को दो अध्यापक कैसे पढ़ा पाएंगे।
सरकार ने मेवात जिले में 41 हाई स्कूल और 39 सीनियर सेकेंडरी स्कूल खोल रखे हैं। मेवात पिछले करीब 10 सालों से प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों के पदों की कमी चली आ रही है। मेवात के बच्चों का पिछले तीन साल से गुड़गांव और फरीदाबाद जिलों से बेहतर रिजल्ट आ रहा है। अगर इन बच्चों को पूरे अध्यापक और अधिकारी मिल जाएं तो मेवात के बच्चे काफी आगे जा सकते हैं।