क्लिक का काला कारोबार कर रही कंपनियों केबीच ज्यादा से ज्यादा लोगों को लूटने की होड़ मची है। वेबवर्क और उसके वेब पोर्टल ड्डस्रस्रह्यड्ढशशद्म.ष्शद्व के जरिए लगभग ढाई लाख लोगों से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाली कंपनी, अनुभव मित्तल की एबलेज कंपनी और उसके सोशल ट्रेड डॉट बिज पोर्टल का अनुसरण करती थी। यही वजह है कि एसटीएफ ने जैसे ही एबलेज कंपनी का भंडाफोड़ किया, वेबवर्क अलर्ट हो गई।
एसटीएफ ने 2 फरवरी 2017 को एबलेज कंपनी के मालिक अनुभव मित्तल, सीईओ श्रीधर प्रसाद व तकनीकी प्रमुख महेश दयाल को गिरफ्तार कर प्रेसवार्ता की थी। एसटीएफ ने प्रेसवार्ता में ही कहा था कि उन्हें इस तरह की और कंपनियों की शिकायत मिली है, जिसकी जांच की जाएगी। इससे वेबवर्क के मालिक अलर्ट हो गए। लिहाजा इन्होंने दस दिन में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन कर रकम ठिकाने लगा दी।
तीन खातों में 26.25 करोड़ रुपये फ्रीज
नोएडा पुलिस ने बृहस्पतिवार को वेबवर्क के पांच बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है। इसमें सेक्टर-18 का आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, यस बैंक, सिटी बैंक और बाराखंभा रोड दिल्ली का विजया बैंक शामिल है। आईसीआईसीआई बैंक के खाते में पुलिस को 15.09 करोड़ रुपये, एक्सिस बैंक खाते में 01 करोड़ रुपये और विजया बैंक खाते में 10.14 करोड़ रुपये जमा हैं, जिन्हें फ्रीज करा दिया गया है।
12 दिन में 18.45 करोड़ रुपये ठिकाने लगाए
- फोटो : राजन राय
नोएडा पुलिस को वेबवर्क केबैंक खातों से चौकाने वाली जानकारियां मिली हैं। वेबवर्क के मालिक अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा ने एबलेज के मालिक अनुभव मित्तल की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही ठगी की रकम को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया था।
धोखाधड़ी की रकम नोएडा पुलिस के हाथ न लगे, इसलिए उसे नोएडा के बैंकों से हटाकर बाराखंभा रोड दिल्ली स्थित विजया बैंक में तेजी से हस्तांतरित किया जा रहा था। विजया बैंक में जमा रकम को भी तेजी से पर्सनल खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था। विजया बैंक में दिसंबर 2016 में खाता खोला गया था।
2 फरवरी 2017 को जिस दिन अनुभव की गिरफ्तारी का पता चला, वेबवर्क के विजया बैंक खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। ये रकम वेबवर्क के ही सिटी बैंक के खाते से ट्रांसफर हुए थे।
तनख्वाह देने के लिए खाते से निकाले थे 1.40 करोड़
- फोटो : राजन राय
इसके बाद 8 फरवरी को वेबवर्क कंपनी से विजया बैंक खाते में 4.5 करोड़ रुपये जमा हुए। इसी दिन कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए वेबवर्क ने खाते से 1.40 करोड़ रुपये निकाल भी लिए। 8 फरवरी को ही विजया बैंक खाते से कंपनी ने वेब होस्टिंग की फीस 56000 रुपये जमा कराई।
इसके बाद एक खाते में 33.24 लाख रुपये, उदित अग्रवाल नाम के व्यक्ति केखाते में 90.75 लाख रुपये, और साक्षी कंस्ट्र्क्शन कंपनी के खाते में 75 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
9 फरवरी को वेबवर्क कंपनी ने बैंक ड्राफ्ट के जरिए सिटी बैंक में जमा 27.39 करोड़ रुपये भी विजया बैंक में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद सिटी बैंक में बैलेंस जीरो हो गया। इसी दिन कंपनी ने एक पर्सनल खाते में 7.21 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। 10 फरवरी को भी एक पर्सनल खाते में 6.86 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
13 फरवरी को कंपनी ने विजया बैंक के खाते से पांच करोड़ रुपये आयकर जमा किया। एक पर्सनल खाते में 38.56 लाख रुपये ट्रांसफर हुए। इसी दिन यस बैंक से 1 करोड़ रुपये विजया बैंक में ट्रांसफर हुए। यस बैंक में ये पैसा उसी दिन सिटी बैंक से ट्रांसफर हुआ था। फिलहाल यस और सिटी बैंक में जीरो बैलेंस है।
पांच और बैंक में खाते की सूचना
- फोटो : राजन राय
वेबवर्क कंपनी के पांच खातों को फ्रीज करा चुकी नोएडा पुलिस को पांच और बैंकों में इनके खाते होने की सूचना मिली है। इसमें साउथ इंडियन बैंक, कर्नाटका बैंक, धनलक्ष्मी बैंक, करूण वैश्य बैंक और इंडसइंड बैंक शामिल हैं। पुलिस इन बैंकों में भी कंपनी या आरोपी मालिकों के बैंक खाते होने की जानकारी जुटा रही है।
पूरा हिसाब खंगालने में लगेगा वक्त
एएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि आरोपियों के कुछ और बैंकों में खाते होने की आशंका है, जिसके जरिए रकम ठिकाने लगाई गई होगी। पुलिस को कंपनी और आरोपियों के सभी बैंक खातों की जांच करनी है।
इसके बाद उनके बैंक खातों की भी जांच करनी है, जिसमें काफी बड़ी राशि ट्रांसफर हुई है। इसके अलावा कंपनी का पूरा हिसाब खंगालना पड़ेगा कि उसने अब तक कितने का कारोबार किया और वो रकम कहां-कहां लगाई है।