दिल्ली में आरकेपुरम सेक्टर-चार में घटनास्थल पर होंडा सिटी कार करीब साढ़े चार घंटे स्टार्ट खड़ी रही। दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार तफ्तीश में ये बात सामने आई है कि तीन दोस्त घटनास्थल पर करीब छह बजे आए थे।
रात करीब साढ़े दस बजे तक कार स्टार्ट खड़ी रही और उसका एसी भी चलता रहा। मृतक लक्ष्मण का घर भी जिस जगह कार खड़ी थी वहां से कुछ ही मीटर की दूरी पर है।
अगर लक्ष्मण के परिजनों ने आकर देख लिया होता तो शायद लक्ष्मण व उसके परिजन जिंदा होते। तीन दोस्त कार में बैठकर किसी डील के बारे में बात कर रहे थे।
आखिर कैसे आया जहर?
आरके पुरम थाना पुलिस ने होंडा सिटी कार की जांच के लिए सीबीआई की सीएफएसएल टीम को बुलाया थी। सीबीआई की टीम ने होंडा सिटी कार को काफी देर स्टार्ट करके रखा था और ये देखने की कोशिश की थी कि कार में कार्बन मोनोआक्साइड जहरीली गैस बनती है या नहीं।
टीम ने जांच में ये भी देखा कि कार के अंदर कार्बन मोनोआक्साइड जहरीली गैस बनी थी या नहीं। टीम ने कार की सीट व अन्य पुर्जों के हिस्से काटकर नमूने लिए।
सीएफएसएल ने करीब डेढ़ घंटे तक कार की जांच की। इसके अलावा कार का मैकेनिकल जांच भी कराई गई और इसके लिए अलग टीम को बुलाया गया था।
कार की एसी बनी मौत का कारण?
जानकारों का मानना है कि अगर गाड़ी स्टार्ट खड़ी रहे और हवा नहीं चल रही हो तो कार के अंदर कार्बन मोनोआक्साइड बन सकती है। सोमवार रात को हवा नहीं चल रही थी और कार कई घंटे स्टार्ट खड़ी रही।
इस स्थिति में एसी के एग्जॉस्ट फैन से हवा कार से बाहर जाने की बजाय कार के अंदर जा सकती है और कार के अंदर जहरीली गैस बनती रहती है।
जानकारों का कहना है कि अगर पीड़ितों को जहर आदि दिया जाता तो उन्हें घबराहट होती और वह कार से बाहर निकलते। जहर की वजह से पीड़ितों को इधर-उधर भागने या बचने का मौका मिलता।