हरियाणा गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष भानी राम मंगला ने कहा कि हरियाणा को गो-तस्करी मुक्त प्रदेश बनाया जाएगा। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने गो-तस्करी करने वालों को हिदायत दी है कि वह यह काम छोड़ कोई और अच्छा धंधा अपना लें।
इसमें उनकी मदद भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि गायों की रक्षा व उनके संवर्धन के लिए प्रदेश में पांच गौ अभ्यारण्य खोलने की योजना है। यह पानीपत, भिवानी, हिसार, सिरसा व यमुनानगर में खोले जाएंगे। मंगला ने गो-तस्करों को गोबर खिलाने वाले वायरल हुए वीडियो के बारे में कहा कि यह काफी पुराना वीडियो है।
उन्होंने यह बातें शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहीं। इस अवसर पर उनके साथ गो तस्करी रोकने के लिए हाल ही में नियुक्त की गई पुलिस उप-महानिरीक्षक भारती अरोड़ा भी मौजूद रहीं।
गऊ हत्या करने वालों को मिलेगी कड़ी सजा
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मंगला ने कहा कि गो हत्या रोकने के लिए हरियाणा में सख्त कानून बनाया गया है। अब गऊ संरक्षण एवं संवर्धन कानून के तहत गऊ हत्या करने वालों को 10 साल की सजा व एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना नहीं चुकाने पर एक साल की सजा बढ़ाने का भी कानून में प्रावधान है।
भारती अरोड़ा ने बताया कि हरियाणा में गौ संरक्षण के लिए सभी जिलों की पुलिस एक टीम के रूप में काम करेगी। उन्होंने कहा कि जो गौरक्षक दल अच्छी भावना से हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गौ-सरंक्षण एवं संवर्धन कानून के अंतर्गत गोमांस खाने, तस्करी करने व रखने पर तीन से सात साल की सजा व 30 से 70 हजार रुपये तक का जुर्माने की व्यवस्था है।
गोवंश की होगी टैगिंग
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बता दें कि प्रदेश में गौ संरक्षण व तस्करी रोकने के लिए सरकार ने अलग से पुलिस विंग बनाई है। जिसका इंचार्ज पुलिस उप-महानिरीक्षक भारती अरोड़ा को बनाया गया है।
प्रदेश में पांच गाय पालने वाले गऊ पालकों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी व पांच से अधिक गाय पालने वाले को 25 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि घरों में जो लोग देसी गाय पालते है उसमें 10 लीटर दूध देने वाली देसी गाय के पालक को 10 हजार रुपये, 15 लीटर तक दूध देने वाली के लिए 15 हजार व 20 लीटर तक दूध देने वाली गाय पालक को 20 हजार रुपये तक की राशि दी जाती है।
अब गोवंश की टैगिंग होगी। ताकि उनको श्रेणियों में विभाजित किया जा सके। इससे उनकी संख्या का सही आकलन किया जा सकेगा। प्रदेश की 425 गऊशालाओं में तीन लाख 20 हजार गौवंश हैं।