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दिल्ली दंगा: अदालत ने शरजील इमाम की जमानत याचिका पर पुलिस से मांगा जवाब, छह मई को होगी मामले को लेकर सुनवाई

Fri, 29 Apr 2022 08:21 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि कानून पर संवैधानिक वैधता पर उच्चतम न्यायालय के समक्ष सुनवाई लंबित है। ऐसे में कोर्ट शरजील व उमर खालिद की जमानत पर सुनवाई 6 मई को करेगा। इतना ही नहीं अदालत ने शरजील की जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली दंगो के मामले में आरोपी शरजील इमाम ने भी जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याची ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि उन पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं बनता। अदालत ने कहा कि कानून पर संवैधानिक वैधता पर उच्चतम न्यायालय के समक्ष सुनवाई लंबित है। ऐसे में कोर्ट शरजील व उमर खालिद की जमानत पर सुनवाई 6 मई को करेगा। इतना ही नहीं अदालत ने शरजील की जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व  न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में धारा 124ए की वैधता के मुद्दे पर 5 मई को सुनवाई तय है और वे इसी के बाद इनकी याचिका पर सुनवाई करेंगे।

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खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील त्रिदीप पेस ने कहा कि उस दिन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई पूरी होने की संभावना नहीं है और वर्तमान जमानत की कार्यवाही केवल धारा 124 ए तक सीमित नहीं है, बल्कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के संबंधित प्रावधानों तक सीमित है। पीठ ने कहा आपका भी मानना है सर्वोच्च न्यायालय में परिणाम महत्वपूर्ण होने जा रहा है। हमें उसके लिए इंतजार करना चाहिए। अदालत ने कहा कि इमाम और खालिद को मामले में सह-साजिशकर्ता कहा गया है और इस प्रकार दोनों जमानत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी। इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने जोर देकर कहा कि देशद्रोह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है और उनकी याचिका जमानत के लिए है।

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फरवरी 2020 के दंगों में दर्ज हुआ था मामला
खालिद और इमाम और कई अन्य पर फरवरी 2020 के दंगों के मास्टरमाइंड होने के लिए यूएपीए मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। दंगो में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे। नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की थी। निचली अदालत ने खालिद और इमाम की जमानत याचिकाओं को क्रमश: 24 मार्च और 11 अप्रैल को खारिज कर दिया था। 

पिछले हफ्ते, दिल्ली पुलिस को जमानत याचिका पर जवाब देने के लिए समय देते हुए, अदालत ने कहा था कि खालिद का भाषण, जो उसके खिलाफ आरोपों का आधार बनता है, अप्रिय था, प्रथम दृष्टया स्वीकार्य नहीं था। इमाम पर दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में सीएए और एनआरसी पर सरकार के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। 
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