बीते साल कोरोना काल की शुरुआत के दौरान निजामुद्दीन मरकज में कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने के मामले में आज हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि मरकज को हमेशा के लिए बंद नहीं रखा जा सकता। जिस पर केंद्र ने कोर्ट से कहा कि यह बेहद गंभीर है और इसके सीमा पार निहितार्थ हैं।
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जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर वह कब तक मरकज को बंद रखना चाहते हैं क्योंकि इसे हमेशा के लिए बंद नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यह बातें वक्फ बोर्ड की उस याचिका की सुनवाई करते हुए कहा जिसमें बोर्ड ने मरकज को दोबारा खोलने की गुजारिश की है।
केंद्र के वकील ने कहा कि मरकज को फिर से खोलने के लिए कानूनी कार्रवाई केवल संपत्ति के पट्टेदार द्वारा शुरू की जा सकती है और परिसर के निवासी ने पहले ही मरकज के आवासीय हिस्से को सौंपने के लिए एक याचिका दायर की है, जो अंतिम निर्णय के लिए लंबित है।
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केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि यह याचिकाएं हाईकोर्ट में ही अन्य जज के अधीन सुनवाई के लिए लंबित हैं। वह बोले कि कानूनी तौर पर वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज की जा सकती है। वक्फ बोर्ड के पास पट्टेदार को दरकिनार कर कोर्ट में अपील करने की शक्ति नहीं है।