रिकॉर्ड तौर पर बढ़ी बेड्स की क्षमता
जब कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी, दिल्ली के पास केवल छह-सात हजार बेड्स ही उपलब्ध थे। जैसे ही कोरोना के मामले बढ़ने लगे, बेड्स की कमी होने लगी। लेकिन इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने अगुवाई की और आज दिल्ली के पास 25,608 कोरोना बेड्स उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर तीसरी लहर में प्रतिदिन 30 हजार नये मामले भी आएंगे तो भी दिल्ली उस स्थिति से निपटने में सक्षम होगी।
चीन के मॉडल को भी दी मात
कोरोना को मात देने के मामले में चीन ने पूरी दुनिया में मिसाल कायम की है। अब वुहान सहित चीन के सभी प्रांतों में जीवन सामान्य होने लगा है। चीन की इस सफलता का राज उसके अनुशासन के साथ-साथ कोरोना से लड़ने की तैयारियों में साफ दिखा था। उसने रिकॉर्ड 10 दिनों में 1000 बेड की क्षमता का अस्पताल बनाकर लोगों को हतप्रभ कर दिया था।
लेकिन देश के एक छोटे से हिस्से दिल्ली ने इस मामले में चीन को भी मात दी है। बेहद सीमित संसाधनों के साथ दिल्ली के डॉक्टरों-इंजीनियरों ने केवल 15 दिन में एक हजार बेड का अस्थायी अस्पताल बनाने में सफलता पाई है। यहां कोरोना मरीजों का इलाज किया जायेगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस अस्पताल के बनने पर दिल्ली के डॉक्टरों-इंजीनियर्स को बधाई दी है।
ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाई
दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। लेकिन इसके लिए दिल्ली सरकार ने कई स्तरों पर तैयारी की। उसे इसके लिए केंद्र से कानूनी लड़ाई तक लड़नी पड़ी। लेकिन उसकी इस लड़ाई का परिणाम हुआ है कि आज दिल्ली के पास अपनी जरूरत का पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध हो चुका है। इतना ही नहीं, ऑक्सीजन की हमेशा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के अनेक अस्पतालों में अपने स्तर पर भी ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू हो गया है।
इंटीग्रेटेड सिस्टम तैयार
कोरोना से लड़ाई में किसी तरह की खामी न रहे, इसके लिए सरकार ने एक इंटीग्रेटेड सिस्टम तैयार किया है। इस सिस्टम से एक ही जगह से दिल्ली के सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन देने, मरीजों के लिए बेड्स की उपलब्धता, एक-एक मरीज को ऑक्सीजन देने, होम आइसोलेशन में रह रहे सभी मरीजों को सहायता देने की भी शुरुआत की गई है। दिल्ली सरकार के इन परिणामों से बेहद सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
गरीब वर्ग की सहायता भी
केजरीवाल सरकार ने एक तरफ तो कोरोना से लड़ाई लड़ी, वहीं दूसरी तरफ गरीब वर्ग को सहायता देने की रणनीति भी अपनाई ताकि उन्हें परेशान होकर पलायन न करना पड़े। अब तक दिल्ली सरकार सभी गरीब परिवारों को दो महीने का मुफ्त राशन देने, ऑटो-रिक्शा चालकों और निर्माण श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने, अनाथ हुए बच्चों और बुजुर्गों को सहायता देने का निर्णय ले चुकी है। इस दौरान किसी को भोजन की कमी न होने पाए, इसके लिए सभी जिला मुख्यालयों पर तैयार भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
क्या लॉकडाउन हटेगा
दिल्ली सरकार की इन योजनाओं का असर हुआ है कि कोरोना की लड़ाई में मजबूती आ रही है और कोरोना के मामले कम होने लगे हैं। यहां तक कि अब इस बात के भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब सरकार को लॉकडाउन उठा लेना चाहिए। लेकिन दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक़ अभी लॉकडाउन हटाने का निर्णय लेने की कोई संभावना नहीं है।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कोरोना के मामले कम होने के बाद भी कोरोना से होने वाली मौतें कम नहीं हुई हैं। जब तक मौतों के मामले कम नहीं होते, संक्रमण के दोबारा बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।