वहीं महिला सेल अभिभावक एकता मंच की सदस्य नूतन शर्मा का कहना है कि पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लॉसेज होनी ही नहीं चाहिए। यह केवल दिखावा है, जिससे स्कूल अभिभावकों से फीस वसूल सके।
अभिभावक एकता मंच की प्रधान कैलाश शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज को लेकर सरकार ने कोई प्रावधान नहीं बनाया। अगर कोई छात्र मोबाइल या इंटरनेट की सुविधा नहीं होने के कारण ऑनलाइन क्लास नहीं ले पा रहा है तो क्या उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। ये बड़े स्कूलों के लिए पैसे वसूलने के ढकोसले मात्र हैं।
एनआइटी-3 स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य रविंदर मनचंदा का कहना है कि बच्चे चार माह से तनाव में हैं। मोबाइल फोन पर पढ़ने से उनकी आंखें कमजोर हो रही हैं। स्वभाव में परिवर्तन आ रहा है। नई गाइडलाइन सभी को फॉलो करनी चाहिए। हम भी फॉलो करेंगे।
क्या कहते हैं डॉक्टर
एशियन अस्पताल के ईएनटी विभाग के निदेशक डॉ. ललित मोहन पराशर कहते हैं कि अगर बच्चे स्पीकर पर फोन या कंप्यूटर क्लास लेते हैं तो कोई असर नहीं पड़ता। इसके विपरीत अगर कानों में लीड लगाकर क्लास लेते हैं तो उनके सुनने की क्षमता कम हो सकती है। ज्यादा तेज आवाज लगातार कान में गूंजने से कान के पर्दे कमजोर होने लगते हैं।
क्यूआरजी हेल्थ सिटी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल सेठ का कहना है कि मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखों के लिए नुकसानदायक होती है जैसे नजर का कम होना, दूर का धुंधला दिखाई देना और पास का भी धुंधला दिखाई देना और आंखों में से पानी आना आदि रोशनी कम होने की वजह है।