लगभग दो साल पहले निर्दलीयों के सहारे गुड़गांव नगर निगम की सत्ता तक पहुंची कांग्रेस अब सीधे विपक्ष की भूमिका में आ गई है।
यह स्थिति मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर सहित 16 पार्षदों के सोमवार को आधिकारिक तौर पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद बनी। निगम सदन की सत्ता पर काबिज होने के साथ ही भाजपा के पार्षदों की संख्या 20 हो गई है। इससे पूर्व सदन में भाजपा में चार पार्षद ही चुनकर आए थे।
वर्ष 2008 में नगर निगम गठन के बाद से यहां चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी, लेकिन गठन के ठीक तीन साल बाद यहां 35 वार्डों के चुनाव हुए। इसमें कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय के रूप में 25 पार्षद जीत कर आए।
इसमें इनेलो और भाजपा के उम्मीदवार पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़े थे। हालांकि इनमें अधिकांश पार्षद मौजूदा कांग्रेसी सांसद राव इंद्रजीत के सहयोग से विजयी हुए थे। यही कारण रहा कि मेयर के चुनाव में उन्होंने अपना पूरा दबदबा दिखाते हुए मेयर सहित, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी अपने खेमे से बनवा लिए।
पिछले दिनों राव ने कांग्रेस की राजनीति को अलविदा कहकर भाजपा का दामन थाम लिया। तभी से उनके समर्थित पार्षदों का भाजपा में जाना तय माना जा रहा था।
फिर बना अजीब संयोग
मेयर चुनाव में राव समर्थित विमल यादव को कुल 20 वोट मिले थे। विमल के विपक्ष में भाजपा की ओर से मेयर का चुनाव लड़ने वाली वार्ड 11 की पार्षद सीमा पाहूजा को कुल नौ वोट मिले थे। जबकि इनेलो के छह पार्षदों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। मौजूदा हालात में विमल के साथ 20 और सीमा के साथ नौ पार्षद खड़े हैं। यह अलग है कि सीमा के साथ के कुछ पार्षदों ने उस समय विमल को वोट दिया था और विमल के साथ खड़े कुछ पार्षदों ने सीमा को। आज दोनों का वोट गणित तो वही है, लेकिन दल बदल गए हैं।
इन पार्षदों ने थामा कमल
मेयर विमल यादव, सीनियर डिप्टी मेयर
यशपाल बतरा, डिप्टी मेयर परमिंदर कटारिया, पार्षद राजेंद्र यादव, सरोज
यादव, मोनिका यादव, तारो देवी, लखपत कटारिया, रविंद्र कटारिया, कालूराम,
अनूप उर्फ वीरेंद्र यादव, सुभाष फौजी, बिंदर गुर्जर, रजनी साहनी, खजान सिंह
और शशि दुआ। हालांकि यशपाल बतरा के पार्टी का दामन थामने पर असमंजस की
स्थिति थी।