जीडीए और पावर कारपोरेशन अधिकारियों की लापरवाही का दंश सीआईएसएफ का एक डिप्टी कमांडेंट झेल रहा है। डिप्टी कमांडेंट का दोष सिर्फ इतना है कि उसने जीडीए का एक मकान नीलामी में खरीद लिया।
अब पावर कारपोरेशन उसे इस मकान पर विद्युत कनेक्शन यह कहते हुए देने से इंकार कर रहा है कि उक्त मकान पर पिछला 37 हजार का बकाया है।
जीडीए अधिकारियों को भी यह जानकारी में नहीं है कि इस मकान में 6 साल तक कौन रहा था। दूसरी ओर पावर कारपोरेशन को भी यह नहीं मालूम कि मकान में विद्युत कनेक्शन के लिए कौन से कागजात लगाए गए थे, क्योंकि इस कनेक्शन की फाइल ही गुम हो गई है।
मामला संजयनगर के सेक्टर 23 के मकान संख्या एम-446 का है। 2012 में सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट सतेंद्र झा ने जीडीए से यह मकान 12 लाख की बोली लगाकर नीलामी में खरीदा था।
सतेंद्र झा के अनुसार उसने विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया तो पावर कारपोरेशन ने बकाया होने का हवाला देकर कनेक्शन देने से इंकार कर दिया।
अधिकारियों का कहना था कि इस मकान में 6 साल से अरुण कुमार नाम का व्यक्ति परिवार के साथ रहा और उसने दो किलोवाट का बिजली कनेक्शन संख्या 0018/023776 छह अप्रैल 98 को लिया था।
2004 तक इसका प्रयोग किया और 37454 रुपये का बकाया होने पर मकान छोड़कर चला गया। जीडीए से जब अरुण की बाबत जानकारी मांगी तो जीडीए अधिकारियों का कहना था कि अरुण नामक किसी व्यक्ति को कभी यह मकान दिया ही नहीं गया। पावर कारपोरेशन के पास भी कोई रिकार्ड नहीं है।
सोमवार को पावर कारपोरेशन में आयोजित उपभोक्ता अदालत में सतेंद्र झा ने यह मामला उठाया। उपभोक्ता अदालत ने पावर कारपोरेशन को तत्काल कनेक्शन देने के आदेश दिए, लेकिन अरुण कुमार कौन था, इस पर अफसर मौन हैं।