उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सदन की बैठक में झाड़ू छाई रही। इसके
चलते बैठक में करीब 50 मिनट तक जमकर हंगामा हुआ।
बैठक में कोई कामकाज नहीं
हो सका। मेयर आजाद सिंह को एजेंडा पारित कर बैठक स्थगित करनी पड़ी। हालांकि
उन्होंने दोनों पक्षों के पार्षदों को शांत कराने का बार-बार प्रयास किया,
लेकिन पार्षदों ने उनकी एक नहीं सुनी।
सदन की बैठक में हंगामे का मुख्य
कारण चर्चा के लिए अल्पकालिक प्रश्न स्वीकार करने का निर्णय लेना रहा।
कांग्रेस ने सफाई व्यवस्था पर चर्चा के लिए अल्पकालिक प्रश्न लगाया था,
जबकि भाजपा की ओर से रोहिणी सेक्टर-नौ स्थित समुदाय भवन लीज पर देने के
संबंध में अल्पकालिक प्रश्न लगाया था।
समुदाय भवन पिछले दिनों आम आदमी
पार्टी के विधायक राजेश गर्ग और भाजपा पार्षद शोभा विजेंद्र के बीच झगड़ा
होने के कारण चर्चा में आया था। मेयर आजाद सिंह ने कांग्रेस के बजाए भाजपा
के अल्पकालिक प्रश्न पर चर्चा कराने का फैसला किया।
सदन बैठक शुरू होते ही
विपक्ष के नेता मुकेश गोयल एवं कांग्रेस पार्षद सतबीर शर्मा ने मेयर के
फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि नगर निगम के पास झाड़ू का ही
कार्य बचा है और उसे करने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
ऐसा ही रहा तो
वह दिन दूर नहीं जब यह कार्य भी उसके हाथ से चला जाएगा। उधर, शोभा विजेंद्र
एवं भाजपा के अन्य पार्षदों ने उनका विरोध किया। इसी बीच दोनों पक्षों के
बीच नारेबाजी और आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
कांग्रेस के रुख
को भांपते हुए मेयर ने सफाई पर चर्चा शुरू कराने का फैसला किया। इस दौरान
मुकेश गोयल ने चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा जैसे दिल्ली सरकार में सरकार
बनाने से वंचित रह गई है, वैसे ही उनकी केंद्र में भी सरकार बनाने की मंशा
पूरी नहीं होने वाली है। उनकी इस टिप्पणी का भाजपा पार्षदों ने कड़ा विरोध
किया और बैठक हंगामे में तब्दील हो गई।
नगर निगम में कुछ भी सही नहीं चल रहा: कांग्रेस
आम आदमी पार्टी के बाद कांग्रेस पार्षदों ने भी नगर निगम के कामकाज पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के बजट की चर्चा शुरू करते हुए विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने अधिकरियों के कामकाज में कोताही और सत्तापक्ष भाजपा के पार्षदों की लापरवाही की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम में कुछ भी सही नहीं हो रहा है।
स्थाई समिति की बैठक में बजट पर बृहस्पतिवार को विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने सुझाव दिए। इस दौरान उन्होंने मुख्य रूप से आयुक्त मनीष गुप्ता पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मनीष गुप्ता के नेतृत्व में कुछ भी सही नहीं हो रहा है।
एक ओर प्रॉपर्टी टैक्स सभी संपत्तियों से नहीं वसूला जा रहा है, वहीं कर्मचारियों को गलत ढंग से बोनस दे दिया। विज्ञापन विभाग में भी भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। गलत ढंग से होर्डिंग्स लगाने का प्रमाण देने के बावजूद आयुक्त ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा विभाग आय जुटाने में भी विफल है।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षा पर एक चौथाई बजट व्यय होता है, परंतु स्कूलों की छवि अच्छी नहीं है। अनेक मदों का एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ है। सफाई व्यवस्था का तो बुरा हाल है। ऐसे में दिल्ली की स्थिति का स्वयं ही आकलन किया जा सकता है।
दूसरी ओर उन्होंने गत वर्ष जनता को अव्वल दर्जे की नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की गई घोषणाओं से एक भी पूरी नहीं हुई। इस कारण जनता स्वयं को ठगा सा महसूस कर रही है।