केंद्र सरकार ने माना कि कंडोम मेडिकल डिवाइस है, लेकिन औषधि अधिनियम के तहत यह दवा की श्रेणी में आता है। ऐसे में इसके दामों पर नियंत्रण लगाना सरकार का दायित्व है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार के अधिवक्ता सुमित पुष्करणा ने जवाब दाखिल किया है। उन्होंने तर्क दिया कि कंडोम डिवाइस होते हुए भी औषधि अधिनियम की धारा 2 के तहत दवा की श्रेणी में है।
इसके चलते सरकार ने इसके दामों पर नियंत्रण लगाने का निर्णय किया, जो उचित है। उन्होंने कहा कंडोम निर्माता कंपनियों ने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अदालत ने अभी तक कोई राहत नहीं दी है। इसके बावजूद कंपनियां मनमाने दामों पर कंडोम बेच रही हैं।