स्काईमेट वेदर के प्रमुख मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने कहा कि इन दिनों मौसम में खास बदलाव नहीं हो रहे हैं। इस वजह से पारा अधिक नहीं लुढ़क रहा है। अगले सप्ताह तक भी मौसम में खास बदलाव की संभावना नहीं है। पलावत का कहना है कि अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं है। हालांकि, दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर बन रहा है। ऐसे में दिसंबर के दूसरे सप्ताह के बाद कड़ाके की सर्दी पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटे में पारा लुढ़का रहेगा व कई जगहों पर धुंध की चादर देखने को मिलेगी। अधिकतम तापमान 28 व न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा सकता है। विभाग का पूर्वानुमान है कि पूरे सप्ताह पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़का रहेगा। ऐसे में पूरे सप्ताह सुबह-शाम सर्दी का अहसास बना रहेगा।
सुबह छाया रहा कोहरा, छूटी कंपकंपी
शुक्रवार की सुबह लुढ़के हुए पारे के साथ कई जगहों पर धुंध की चादर देखी गई। ऐसे में अलसुबह घरों से बाहर निकले लोगों की कंपकंपी छूट गई। लोग सुबह टोपी व मफलर समेत अन्य गर्म कपड़ों के साथ नजर आए। हालांकि, धूप निकलने के साथ सर्दी का अहसास कम हुआ। अधिकतम तापमान सामान्य से दो अधिक 28.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हवा में नमी का स्तर 30 से 95 फीसदी रहा। शाम होते ही वातावरण में सर्दी का अहसास बढ़ गया था।
बेहद खराब श्रेणी में पहुंची एनसीआर के शहरों की हवा
मौसमी परिस्थितियों में हुए बदलाव की वजह से एनसीआर के शहरों की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। सबसे खराब हवा 332 औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक(एक्यूआई) के साथ ग्रेटर नोएडा की दर्ज की गई है। वहीं, दिल्ली की हवा 294 एक्यूआई के साथ खराब श्रेणी के उच्चतम स्तर में दर्ज हुई है। वायु मानक एजेंसियों का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में भी हवा की सेहत में खास बदलाव की संभावना नहीं है।
केंद्र की वायु मानक संस्था सफर इंडिया के मुताबिक, बीते 24 घंटे में उत्तर भारत में पराली जलने की वजह से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी चार फीसदी रही है। पीएम 2.5 से छोटे कणों की पीएम 10 में 52 फीसदी हिस्सेदारी रही। पीएम 10 का स्तर 228 व पीएम 2.5 का स्तर 121 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किया गया। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान(आईआईटीएम) के मुताबिक, बीते 24 घंटे में पंजाब में 44 जगहों पर पराली जलने की घटना रिकॉर्ड हुई। वहीं, हरियाणा में 28, उत्तरप्रदेश में 241, मध्यप्रदेश में 315 और राजस्थान में सात जगहों पर पराली जलने की घटना रिकॉर्ड की गई है।
इस वजह से खराब हुई हवा की गुणवत्ता
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा की रफ्तार कम होने के साथ पारा लुढ़कने की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। साथ ही पराली के धुएं और स्थानीय पर स्तर पर होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी जारी है। आईआईटीएम के मुताबिक, बीते 24 घंटे में मिक्सिंग हाइट एक हजार मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स तीन हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रहा। साथ ही हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम और हवा की रफ्तार छह किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज की गई। हवा की रफ्तार 10 से कम व वेंटिलेशन इंडेक्स छह हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से कम होने पर प्रदूषकों को जमने में मदद मिलती है। विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले तीन दिनों तक मिक्सिंग हाइट में बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, अगले 24 घंटे में वेंटिलेशन इंडेक्स 5800 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड और रविवार को यह घटकर तीन हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड तक दर्ज किया जा सकता है।
दिल्ली-एनसीआर का एक्यूआई
दिल्ली- 294
फरीदाबाद- 323
गाजियाबाद- 302
ग्रेटर नोएडा- 332
गुरुग्राम- 254
नोएडा- 259