देश की सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार एम्स में कुल 50 सर्वर हैं। इनमें से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तीन सर्वर हैं। इन तीनों सर्वर से ही एम्स की सभी सेवाएं चलती हैं। बाकी एम्स के सर्वर हैं और उससे विभाग का अन्य काम होता है। सुरक्षा एजेंसी के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एम्स के एंटी-वायरस सर्वर का लाइसेंस खत्म हो गया था। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि एम्स के कंप्यूटर बहुत ही पुराने हैं और वह ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामले की जांच लंबी होती है। अभी डाटा की स्कैनिंग की जा रही है। जांच में कई दिन लग सकते हैं।
एम्स के सुरक्षा विभाग की शिकायत पर इस मामले में स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन(आईएफएसओ) में बृहस्पतिवार को एफआईआर दर्ज की गई थी। आईएफएसओ की एक टीम इस मामले में विशेष तौर से जांच कर रही है। साथ ही कंप्यूटर एमरजेंसी रेस्पांस टीम को भी जांच में लगाया गया है। इसके अलावा दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं।
सफदरजंग में भी फेल हुआ था सर्वर
सफदरजंग अस्पताल में भी करीब एक सप्ताह पहले सर्वर ठप हुआ था। इसके के बाद ऑनलाइन सेवाएं ठप हो गई थीं। जांच रिपोर्ट व अन्य के लिए मैनुअल आधार पर काम किया गया। आरएमएल में भी करीब 15 से 20 दिन पहले सर्वर ठप हुआ था।
एम्स का सर्वर तीसरे दिन शुक्रवार को भी ठप रहा। सर्वर डाउन होने के कारण उपचार के लिए एम्स पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। खासकर दिल, दिमाग व गंभीर रोगों से जुड़े मरीजों को। इन मरीजों की रिपोर्ट के लिए डॉक्टरों को काफी इंतजार करना पड़ा। इलाज कराने आए मरीजों ने कहा कि पर्ची तो समय पर बन गई पर डॉक्टर के कमरे में मैनुअल रिपोर्ट हासिल करने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। वहीं, ओपीडी में मरीजों को हो रही समस्या को देखते हुए शुक्रवार को एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने सभी विभाग प्रमुखों को स्टाफ की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया है। अपने निर्देश में उन्होंने लिखा कि ओपीडी में परामर्श और जांच के लिए आ रहे मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए अतिरिक्त जनशक्ति संसाधनों को तैनात किया जाए। इसमें संकाय, रेजिडेंट, वैज्ञानिक, परियोजना कर्मचारी, व अन्य कर्मचारियों को मरीजों की सुविधा के लिए लगाने का फैसला लिया गया है। वहीं, एम्स में सर्वर फेल होने के बाद खून के नमूने लेने के लिए एक बार फिर से रंगों के आधार पर रिकार्ड तैयार करने का फैसला लिया गया है। इसे लेकर जारी हुए आदेश में कहा गया है कि पीले रंग के फार्म के साथ रक्त के नमूनों को जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच केवल प्राथमिकता के आधार पर होगी। मरीज की पूरी जानकारी सैंपल व यलो फार्म में अंकित किया जाएगा।