केजरीवाल सरकार जहां अपने वादों को पूरा करने में जुटी हुई है तो वहीं दूसरी अब उन्हें बिजली के दाम एक बड़ा झटका दे सकते हैं। केजरीवाल को टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर चौंका सकती है।
अखबार के मुताबिक दिल्ली के लिए बिजली देने वाला डीईआरसी कीमतों में बढ़ोत्तरी करने की पूरी तैयारी कर चुका है। जिसके लिए बढ़ोत्तरी का प्रतिशत 10 से 15 फीसदी तक तय कर लिया गया है।
वहीं दूसरी ओर केजरीवाल ने लोगों को 50 फीसदी बिजली की कीमतें कम करना का दावा भी किया है, लेकिन यदि डीईआरसी कीमतों में बढ़ोत्तरी निर्णय लागू कर लेती है तो केजरीवाल सरकार के लिए मुश्किल हो सकती है।
पिछली बार इस वजह से सस्ती हो गई थी बिजली
बिजली सस्ती करने का केजरीवाल का ये वादा राजनीतिक आलोचनाओं की वजह से सुर्खियों का खासा हिस्सा भी बन चुका है। आपको बता दें कि एक खास वजह से केजरीवाल पिछली सरकार में बिजली सस्ती करने में कामयाब हो गए थे।
ये खास वजह ये थी कि उस वक्त डीईआरसी ने खरीद समायोजन शुल्क यानि की पीपीएसी को घोषणा किए जाने के एक दिन के अंदर ही वापस ले लिया था। लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं।
इस बार डीईआरसी जो कदम उठाने जा रही है उसमें पीपीएसी छह महीनों के लिए तय कर दिया जाएगा। अगले महीने डीईआरसी इसकी घोषणा भी की जा सकती है।
क्या दर बढ़ी तो सस्ती मिल पाएगी बिजली
दिल्ली में बिजली नियामक ये संस्था ही बिजली की दरें तय करती है। ऐसे में लोगों को 10 से 15 फीसदी बिजली की कीमतें ज्यादा चुकानी होंगी। इसके अलावा वितरण टैरिफ की भी जांच की जा रही है।
आने वाले अप्रैल तक इसकी घोषणा की भी पूरी संभावना है। ऐसे में आधे दामों पर दिल्ली को बिजली देने का वायदा केजरीवाल के लिए दिक्कत भरा हो सकता है।
केजरीवाल ने अपने वादों को पूरा करने के लिए एक विशेषज्ञों की टीम भी बना ली है, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय से भी जोड़ने की योजना है, लेकिन क्या महज इस टीम भर से बिजली के दाम कम किए जा सकते हैं यो सोचने वाला सवाल है।