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‘आप’ से जुड़े वकीलों की अब होगी नियुक्ति

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की ऐतिहासिक जीत के बाद हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार की पैरवी करने वाले वकीलों पर गाज गिरने वाली है। दिल्ली सरकार ने अपनी पैरवी के वकीलों के पैनल में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली में पिछली बार मात्र 49 दिन की सरकार के चलते ऐसा नहीं हो पाया था। लोकसभा में भाजपा की जीत के बाद केंद्र सरकार ने भी अपने पैनल में बदलाव किया था।
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हाईकोर्ट में केंद्र हो या दिल्ली सरकार, जिस पार्टी की भी सरकार होती है वह अपनी पार्टी से जुड़े वकीलों को पैनल में शामिल करती है ताकि अदालत में सरकार का सही ढंग व पार्टी की नीति के तहत पक्ष रखा जा सके।

हाईकोर्ट में क्रिमनल साइड व सिविल साइड में एक-एक स्थायी अधिवक्ता के अलावा 6-6 अतिरिक्त अधिवक्ता और करीब 25 से 30 अन्य वकीलों की बतौर सरकारी वकील के रूप में नियुक्ति होती है। वर्ष 2013 में आप की सरकार बनी लेकिन मात्र 49 दिन ही सरकार चलने के कारण आप सरकार अपनी पार्टी से जुड़े वकीलों को नियुक्त नहीं कर पाई।
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49 दिन की सरकार के कारण नहीं बदल पाएं थे वकील

सरकार ने पारदर्शिता बरतते हुए सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए एक प्रारूप निकाल दिया जिसके तहत वकीलों की परीक्षा ली जा सके। यही कारण है कि सरकार को निर्णय लेने में देरी हो गई।

हाईकोर्ट में वकालत करने वाले आप से जुड़े वरिष्ठ वकील के अनुसार इस बार पिछली गलती नहीं दोहराई जाएगी। इस बार जल्द से जल्द कांग्रेस से जुड़े वकीलों को बदल कर अन्य वकीलों यानी पार्टी से जुड़े वकीलों को नियुक्त किया जाएगा ताकि सरकार को किसी भी मामले की सुनवाई में मुश्किल का सामना न करना पड़े।

माना जा रहा है कि वकीलों की नियुक्ति में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, राहुल मेहरा, एचएस फुलका इत्यादि की राय से ही वकील नियुक्त किए जाएंगे।

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अंतिम बार शीला सरकार ने नियुक्त किए थे कांग्रेस से जुड़े वकील

इससे पूर्व राजधानी में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार ने वर्ष 2001 में कांग्रेस से जुड़े वकीलों को अपने पैनल में शामिल किया था। क्रिमिनल साइड से अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता व सिविल साइड से अधिवक्ता नजमी वजीरी स्थायी अधिवक्ता पद पर थे और दोनों ही हाईकोर्ट में जज बन गए। उनके बाद क्रमश: पवन शर्मा व जुबेदा बेगम को नियुक्त किया गया। इनके अलावा क्रिमिनल व सिविल साइड में करीब 80 से 90 वकीलों की नियुक्ति हुई।

बाद में पवन शर्मा की अपेक्षा क्रिमिनल साइड में अधिवक्ता दयान कृष्णन को स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया लेकिन कुछ ही दिनों में वे हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता बन गए और उनका काम अतिरिक्त अधिवक्ता के रूप में सलीम अहमद काम देख रहे हैं।
अब तय है इन सभी पर गाज गिरेगी और कुछ ने अपनी पुन: नियुक्ति के लिए आप से संपर्क करना शुरू कर दिया है जबकि अधिकांश ने अपना बस्ता समेटना शुरू कर दिया है।

क्रिमिनल साइड में नियुक्ति के लिए मुख्य न्यायाधीश से वकीलों की नियुक्ति के लिए मंजूरी लेनी पड़ती है जबकि सिविल साइड में ऐसी कोई रोक-टोक नहीं है। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने भी एक माह में ही केंद्र सरकार की पैरवी करने के लिए हाईकोर्ट में अपनी पार्टी से जुड़े भाजपा लीगल सेल के वकीलों की नियुक्ति कर दी थी।
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