केजरीवाल ने कहा कि अधिकारी पहले सही से काम कर रहे थे, मगर अब वे कार्य रोकने में लग गए हैं। दरअसल, भाजपा के इशारे पर उपराज्यपाल ने अधिकारियों को सस्पेंड करने और ईडी पीछे छोड़ने कार्य नहीं करने के निर्देश दिए है। इसका उदाहरण बस मार्शल योजना के तौर पर मिल रहा है। यह योजना वर्ष 2015 से चल रही थी, लेकिन इसे एक नवंबर 2023 से बंद कर दिया गया।
इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि सिविल डिफेंस वालेंटियर्स का बसों में सुरक्षा संभालने का कार्य नहीं है। जबकि आठ साल तक उनको इस ओर ध्यान नहीं आया। उन्होंने खुलासा किया कि अगस्त 2023 के बाद से परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा भी बदल गए, क्योंकि उनको उपराज्यपाल ने बुलाकर धमकी दी कि बस मार्शल स्कीम बंद करो, वरना सस्पेंड कर दिया जाएगा और ईडी-सीबीआई पीछे लगा दी जाएगी। जबकि यह योजना बसों में सफर कर रही महिलाओं में बहुत प्रसिद्ध थी। बस में सफर कर रहे लोगों को लगता था कि वर्दी में बैठा व्यक्ति हमारी सुरक्षा करेगा। मार्शल आज सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं।
दूसरी ओर उन्होंने खुलासा किया कि बसों में सीसीटीवी कैमरे व पैनिक बटन लगने का हवाला देकर उपराज्यपाल ने सिविल डिफेंस वालेंटियर्स पर 280 करोड़ रुपये खर्च करने पर सवाल उठाया है। उनके इस तर्क पर मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि सीसीटीवी कैमरे से ही सुरक्षा हो सकती है तो राजनिवास के चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, दीवारों पर पैनिक बटन भी लगा देते हैं और उपराज्यपाल की सुरक्षा हटा देते हैं।
आगे कहा कि पूरी दिल्ली में भी सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं और बिजली के खंभों पर पैनिक बटन भी लगा देते हैं, फिर दिल्ली पुलिस की क्या जरूरत है? उन्होंने अगस्त-सितंबर 2023 में बस मार्शल योजना बंद नहीं करने के संबंध में आदेश दिए थे। विधानसभा में आप विधायक दिलीप पांडेय ने सिविल डिफेंस वालेंटियर्स की नौकरी बहाली की मांग को लेकर सदन में संकल्प पत्र पेश किया, जिसे सदन ने ध्वनि पास कर दिया गया।
उपराज्यपाल की चिट्ठी में लिखी भाषा पर सवाल उठाया
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बुधवार को उपराज्यपाल का एक पत्र मिला, जो बिल्कुल निंदनीय है। इस पत्र में जिस भाषा का प्रयोग किया गया है, वह अत्यंत भद्दी और आपत्तिजनक है। उनको अपने पत्र में हमारी सरकार पर यह कहते हुए आरोप लगाया है कि आप लोग छोटे-मोटे राजनीतिक खेलों के लिए ये सब कर रहे हैं। आप अपनी अकुशलता के लिए बहाना बना रहे हैं। इस बात को विधानसभा के अध्यक्ष तक पहुंचाएं, जिससे कि इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या विधानसभा अध्यक्ष उनके लिए काम कर रहे हैं? क्या उपराज्यपाल को इतना भी नहीं पता कि विधानसभा अध्यक्ष एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था हैं और वह मुख्यमंत्री को रिपोर्ट नहीं करते हैं?