एनसीआर की पहली महिला ऑटो चालक भी अफसरों की मनमानी से त्रस्त हैं। मुख्यमंत्री के ऑटो देने और डीएम के रजिस्ट्रेशन कागजात सौंपने के बावजूद परिवहन विभाग ने रूबी को परमिट जारी नहीं किया। आरटीओ ऑफिस की लापरवाही से वह ऑटो घर पर खड़ा रखने को मजबूर है।
रूबी को 13 फरवरी को मुख्यमंत्री ने एनसीआर ऑटो सौंपा था। इसके अगले दिन 14 फरवरी को रविवार होने के बावजूद डीएम ने अपने आवास पर ऑटो के कागजात दिए थे। ऑटो संचालन का परमिट आरटीओ ऑफिस से जारी किया जाना था।
गाजियाबाद ऑफिस से परमिट बनाने के बाद अफसरों को दिल्ली से एनओसी दिलानी थी। इसके बाद ही ऑटो का संचालन हो सकता था। आरटीओ ऑफिस से रूबी को एनसीआर का परमिट अपूर्ण दे दिया गया।
दिल्ली से एनओसी लेने की जिम्मेदारी उस पर ही डाल दी। ऐसे में रूबी दो सप्ताह से दिल्ली और गाजियाबाद के अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं।
उनको परमिट जारी नहीं किया जा रहा है, जिससे रूबी का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। रूबी का आरोप है कि परिवहन विभाग सभी को परमिट कंप्लीट कर दे रहा है, जबकि मुझको अधूरा ही थमा दिया गया है।
परमिट न होने से दो सप्ताह से ऑटो घर पर खड़ा है। आरटीओ ऑफिस में अजीब सा व्यवहार किया जा रहा है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री ऑफिस को भेज दी है।