उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उपराज्यपाल वीके सक्सेना
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दिल्ली सरकार और राजनिवास के बीच ठेके पर ठना विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राजनिवास सूत्रों ने दिल्ली सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें नई आबकारी नीति से राजस्व में वृद्धि बताया गया है। कहा है कि घोटाले की सीबीआई जांच की आंच से बचने के लिए सरकार झूठ बोल रही है। आंकड़े के आधार पर बताया कि पिछले पांच साल में (2017-18 से 2021-22) शराब बिक्री से होने वाले राजस्व में 567.98 करोड़ रुपये की कमी आई है।
राजनिवास सूत्रों का दावा है कि 2022-23 की पहली तिमाही में सरकारी राजस्व में 1484 करोड़ रुपये की वृद्धि नहीं हुई। दिल्ली सरकार की तरफ से जो झूठ गढ़ा गया है, वह वास्तव में उत्पाद राजस्व शुल्क है। इसमें 980 करोड़ रुपये विक्रेता लाइसेंस धारियों की सुरक्षा राशि (डिपोजिट मनी) है, जिसे वापस किया जाता है। सीबीआई जांच से बचने के लिए आबकारी विभाग के प्रभारी मंत्री मनीष सिसोदिया की तारीफ में मुनाफे का गलत आंकड़ा सरकार की तरफ से पेश किया गया। कोरोना संक्रमण जब चरम पर था तो स्वघोषित ईमानदार सरकार ने शराब माफिया को छूट की अनुमति दी।