सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रेहड़ी-पटरी वालों को स्थायी तौर पर जगह देने के मुद्दे पर शुक्रवार को हुई नगर निगम प्रशासन की बैठक में व्यापारी नेताओं ने जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि यह सरकार का चुनावी स्टंट है। इसके बाद बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई।
राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को निगम से शहर में तमाम रेहड़ी, पटरी एवं मोबाइल रेहड़ी वालों को स्थायी जमीन देने पर विचार करने को कहा था।
निगम सभागार में निगमायुक्त सुप्रभा दहिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेयर अशोक अरोड़ा, सीनियर डिप्टी मेयर मुकेश शर्मा, कई पार्षद व अधिकारी शामिल थे।
निगम प्रशासन ने प्रस्ताव पर सुझाव लेने के लिए व्यापार मंडल और कई आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों को बुलाया था। बैठक में अफसरों ने कहा कि शहर में कई बाजारों में रेहड़ी व पटरी वालों की वजह से जाम के हालात बन जाते हैं।
इसलिए सभी रेहड़ी व पटरी वालों को सभी जोन में स्थायी तौर पर जगह देने की योजना है। इस योजना का सर्वे वर्ष 2011 में कराया गया था।
इस पर व्यापार मंडल के अध्यक्ष जगदीश भाटिया ने कहा कि सर्वे 2011 में हुआ है तो इतने साल बाद इस योजना की याद कैसे आ गई। उन्होंने योजना में कई बड़ी खामियां गिनाते हुए इसे चुनावी स्टंट करार दिया और बैठक का बहिष्कार कर दिया।
भाटिया का कहना है कि बाजारों की हालत खराब है। वहां जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। सड़कें खस्ता हैं। स्ट्रीट लाइट जलती नहीं। बाजारों में टायलेट तक का इंतजाम नहीं है।
यह सब तो प्रदेश सरकार सुधार नहीं पाई, अब रेहड़ी-पटरी वालों को लुभाने के लिए नया हथकंडा अपनाया जा रहा है। उधर, मेयर अशोक अरोड़ा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर रेहड़ी-पटरी वालों के प्रतिनिधियों व अन्य व्यापारी प्रतिनिधियों को बुलाकर उनसे सुझाव मांगे गए हैं।
इन पर विचार कर एक-दो स्थानों पर इसे प्रयोग के तौर पर आजमाया जाएगा।