दरअसल, पीढ़ीगत मोची का काम करने वालों की संख्या तेजी से घट रही है। इस रोजगार के साथ युवाओं को स्मार्ट तरीके से जोड़ने के लिए एमएसएमई मंत्रालय ने योजना शुरू की है। इंस्टीट्यूट ने मेले में मोची ऑन ह्वील्स का पूरा सेटअप लगाया है। कैसे मोची पेड़ों के नीचे और गली की नुक्कड़ पर बैठकर जूते-चप्पल ठीक करते थे। अब संस्थान ने एक नया प्रयोग शुरू किया है। ये प्रगति मैदान के हॉल पांच में देख और समझ सकते हैं।
हर शहर में घूमेगी मोची ऑन ह्वील्स : सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट-आगरा के कनिष्ठ तकनीकी अधिकारी सुरेश चंद्र चौहान ने बताया, कि आने वाले समय में मोची ऑन ह्वील्स हर शहर में घूमते नजर आएंगे। एक दिन में करीब 100 किमी घूमेगा। मौजूदा समय संस्थान में 453 छात्र इसका प्रशिक्षण ले रहे।
खादी ग्रामोद्योग आयोग के अंतर्गत पूरे देश से 30 छात्र अलग चुनकर आए हैं। ये भी इसी का प्रशिक्षण ले रहे।
संस्थान में दो साल का कोर्स कराया जा रहा
मोची ऑन ह्वील्स चार्जिंग बैटरी से चलने वाला एक ई वाहन है, जिसपर स्ट्रिचिंग मशीन, सोल प्रेस मशीन, शू फिनिशिंग मशीन, सोल चिपकाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। इसके अलावा जूता बनाने का हर टूल्स भी है। संस्थान के फैकल्टी मनोज कुमार ने बताया कि युवाओं को इस पहल के अंतर्गत दो साल का कोर्स कराया जा रहा। युवा इसमें दिलचस्पी दिखा रहे।