सीबीआई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार को भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। अब सरकारी नियम के मुताबिक, सरकार उन्हें निलंबित कर सकती है। इस लिहाज से राजेंद्र कुमार शायद सीबीआई की नब्ज भांपने में नाकाम रहे।
अगर वे अग्रिम जमानत ले लेते तो शायद निलंबन से बच सकते थे। किसी भी सरकारी अधिकारी को गिरफ्तारी के बाद निलंबित माना जाता है। अगर कोई अधिकारी 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहता है तो विभाग उसे निलंबित कर देगा।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, आपराधिक मामले में एक बार निलंबन होने के बाद राजेंद्र कुमार की दोबारा बहाली तब ही हो सकती है जब सुप्रीम कोर्ट उन्हें बरी कर देती है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आपराधिक मामलों में विभाग अपने अधिकारी की बहाली नहीं कर सकता। पेश मामले में, सीबीआई ने 15 दिसंबर, 2015 को राजेंद्र कुमार के कार्यालय में छापेमारी की थी।