दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। सरकार ने जनता को गुमराह करने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए मोहल्ला क्लीनिक खोल दिए, लेकिन अधिकांश मोहल्ला क्लीनिक में गैर जिम्मेदार, अनुभवहीन चिकित्सक और सब स्टैंडर्ड पैथलैब हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक की कलई खोली। उन्होंने रोहिणी सेक्टर-16 एफ ब्लॉक स्थित मोहल्ला क्लीनिक की शिकार एक महिला और उसके परिवार के मामले का खुलासा किया।
उनके साथ भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा और जगदीश प्रधान, पीड़ित महिला का पति भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला मौसम कुमारी गत चार अप्रैल से लगातार मोहल्ला क्लीनिक में इलाज के लिए जा रही थी।
'मोहल्ला क्लीनिक में इलाज कराकर दर-दर भटक रहे मरीज'
केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
इस दौरान उनके खून की जांच कराई, जिसमें महिला को थैलीसीमिया पीड़ित दिखाया गया था। इसी बीच उनके खून की जांच एक निजी लैब में कराई, जहां उनको कोई बीमारी नहीं दिखाई गई।
इसके चलते मौसम कुमारी के पति ने स्वास्थ्य मंत्री को पूरे मामले की दो बार शिकायत की। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन न तो उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई हुई न ही स्वास्थ्य मंत्री या कोई अन्य अधिकारी उसकी शिकायत सुनने के लिए मिला।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मौसम कुमारी का मामला अकेला नहीं है। मोहल्ला क्लीनिक में इलाज कराकर अपना जीवन बर्बाद करने वाले अनेक मरीज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। ये क्लीनिक मरीजों के मददगार न बनकर उनके लिए खतरे की घंटी बन गए हैं।
आप ने लगाया विपक्ष पर बदनाम करने का आरोप
विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक पर दिल्ली भाजपा की तरफ से लगाये गये आरोपों को साजिश करार दिया है। देर शाम सरकार ने एक बयान जारी कर कहा है कि दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।
विपक्ष इन्हें साजिशन बदनाम कर रहा है। सरकार का कहना है कि निजी लैब में कराई गई जांच गोल्ड स्टर्ड की नहीं थी। आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक में हुई हिमोग्लोबिन की जांच डी-10 स्तर की है।
रिपोर्ट में थैलीसिमिया होने की संभावना जताई है। हालांकि, सरकार ने कहा कि जो भी शिकायत आई है उसकी जांच की जाएगी।