दिल्ली के शालीमार इलाके में छह साल पहले संदिग्ध परिस्थिति में छत से गिरकर एक युवक की मौत हो गई थी। सोमवार को पुलिस ने इस मामले हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने यह मामला अदालत के आदेश पर दर्ज किया है। युवक की मां का दावा है कि उसके बेटे ने होश में आने के बाद बताया था कि कुछ बदमाशों ने उसे अगवा कर एक फ्लैट में बंद कर दिया। फ्लैट में बदमाशों ने उसके साथ कुकर्म करने कोशिश की, जब उसने उनके चंगुल से भागने की कोशिश की तो बदमाशों ने उसे छत से धक्का दे दिया था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज करने के बाद नए सिरे से जांच शुरू कर दी गई है। 65 साल की विधवा महिला अपने बेटे के साथ सुल्तानपुरी में रहती थी। उसने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका बेटा पीतमपुरा स्थित एक कंपनी में काम करता था। 29 अप्रैल 2017 को बेटा देर रात तक घर नहीं पहुंचा। उसने मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उसका फोन बंद था। रात करीब 11 बजे शालीमार बाग थाने से एक पुलिस कर्मी उसके घर आया और बताया कि बेटा घायल हो गया है और शालीमार बाग के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती है।
अस्पताल पहुंचने पर उसने बेटे को बेहोशी हालत में देखा। आर्थिक तंगी की वजह से उसने बेटे को निजी अस्पताल से निकालकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। महिला ने दावा किया कि अगले दिन बेटा होश में आया। उसने उसे और अपने बहनोई को बताया कि दो बदमाशों ने कार्यालय से आने के दौरान चाकू दिखाकर उसे अगवा कर लिया। दोनों उसे शालीमार बाग स्थित हरियाणा सरकार हाउसिंग कॉम्प्लेक्स स्थित फ्लैट में ले गए। उसे कमरे में बंद कर बदमाशों ने शराब पी और फिर उसकी पिटाई कर दी।
महिला का आरोप है कि तत्कालीन जांच अधिकारी ने उसके बेटे से कुछ खाली कागजात पर तीन-चार हस्ताक्षर करवाए। होश में आने के बाद उसके बेटे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। चार मई को दर्द होने की शिकायत पर दोबारा आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसने दम तोड़ दिया। महिला का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके बाद उसने मामला दर्ज करने की मांग को लेकर अदालत में गुहार लगाई। मामले की सुनवाई और सारे साक्ष्य देखने के बाद अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं।