सुप्रीम कोर्ट के डीजल टैक्सियों के मामले में राहत नहीं देने के बाद ऐप आधारित कैब कंपनियां कि कलई खुलती दिख रही है। ऐसी कंपनियों से जुड़े ड्राइवर उन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले तो उन्हें ज्यादा फायदे का लालच देकर गाड़ी की खरीदने को कहा गया और अब बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति तेजी से खराब होती जा रही है। ऐसे ड्राइवरों की संख्या एक लाख से भी ज्यादा है।
टैक्सी चालकों का कहना है कि पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान ऐप बेस्ड कंपनियों और बीपीओ आधारित कंपनियों में गाड़ी चलाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में करीब 90,000 गाड़ियां खरीदी गईं। इनको अलग-अलग कंपनियों से मुनाफे के लिए जोड़ा गया। इनमें से कुछ ऐप आधारित कंपनियों ने उन्हें एक लाख रुपये महीने का बिजनेस देने का वादा करते हुए छूट देने का ऑफर दिलाकर कंपनी से जुड़ने को भी कहा। अब पिछले दो माह से कुछ अन्य शर्तों पर 20,000 रुपये में भी ऐसी कंपनियां चालकों को गाड़ी दे रही थीं।
चालकों का दावा है कि अकेले नोएडा-गाजियाबाद में ऐप आधारित कंपनियों की 30,000 डीजल टैक्सियां बाहर हो गईं हैं। वहीं दिल्ली-एनसीआर में प्रभावित ड्राइवरों में से 70 फीसदी ऐसे ड्राइवर हैं, जिन्होंने ऐसी कंपनियों के कहने पर गाड़ी खरीदकर कंपनी से जोड़ी थी। इन्हें एक झटके में ही बाहर का रास्ता दिखाया गया। उनका दावा है कि अगर उन्हें राहत नहीं मिली तो ऐप आधारित सीएनजी टैक्सियों को भी एनसीआर में नहीं चलने देंगे।
बड़ी कंपनियों ने भी दिखाया बाहर का रास्ता
टैक्सी चालकों का कहना है कि अमेरिकन एक्सप्रेस, एचसीएल और एडोब जैसी बड़ी कंपनियों ने आदेश के पहले दिन ही ऐसी गाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कंपनियों ने उन्हें सीएनजी टैक्सी लाने को कहा है।
करीब छह लाख कर्मचारी प्रभावित
डीजल कैब बंद होने से दिन के समय नौकरी करने वाले बीपीओ सेक्टर से जुड़े हुए करीब चार लाख कर्मचारी एनसीआर में प्रभावित हैं। रात में नौकरी करने वालों की संख्या को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा छह लाख तक पहुंच जाएगा। दिन के समय केवल सीएनजी टैक्सियों का ही उपयोग किया जा रहा है। इस वजह से यह कर्मचारी खासे परेशान हैं। वहीं रात में चोरी-छिपे डीजल टैक्सियों का भी उपयोग कर्मचारियों को घर पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
राहत मिलने पर शांति नहीं तो क्रांति
फिलहाल दो दिन का समय रोडमैप के लिए दिया गया है। हो सकता है कि डीजल आधारित टैक्सी चालकों को राहत मिल जाए। वहीं चालकों का कहना है कि अगर राहत मिली तो वे शांत रहेंगे और अगर नहीं मिली तो क्रांति होगी।
डीजल टैक्सियों को सीएनजी में बदलना कठिन
डीजल टैक्सियों को सीएनजी में बदलना बेहद कठिन है। इसमें दो से ढाई लाख रुपये का खर्च आएगा। यही नहीं रजिस्ट्रेशन में भी दिक्कत आएगी। वहीं एआरटीओ (प्रशासन) रचना यदुवंशी का कहना है कि हमें अभी तक ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि अगर कोई डीजल गाड़ी सीएनजी में बदली जाती है तो कागजी कार्रवाई करते हुए उसे सीएनजी में दिखाया जाए।
परमिट की अवधि तक गाड़ी चलाने की मिले अनुमति
चालकों का कहना है कि अगर उन्हें तीन साल तक गाड़ी चलाने की अनुमति आरटीओ से मिली है तो कम से कम तीन साल तक रोक नहीं लगानी चाहिए। इसके बाद अगर वह गाड़ी को सीएनजी में नहीं बदलते हैं तो कार्रवाई करें। लेकिन कम से कम तीन साल तक छूट तो मिलनी ही चाहिए। क्योंकि इस बीच फाइनेंसर एनओसी नहीं देगा। यही नहीं वह गाड़ी बेच भी नहीं सकते। यही नहीं बैंक का लोन भी चुकाना होगा।