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Cancer Cure: रोके जा सकते हैं आनुवंशिक कैंसर के 95 फीसदी मामले, इस जांच से पता लग जाएगा; किसको कितना खतरा

Sun, 11 Sep 2022 09:02 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश में कैंसर के 15 लाख से अधिक मामले हैं। इनमें से आधी संख्या महिलाओं की है। इस संबंध में डॉक्टर एस वीएस देव ने बताया महिलाओं को स्तन, ओवरी व यूट्रस कैंसर का एक कारण अनुवांशिक होता है।
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डॉ. रंजीत मनचंदा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माता-पिता से बच्चों तक पहुंचने वाले (आनुवंशिक) कैंसर को 95 फीसदी तक रोका जा सकता है। जेनेटिक जांच से पता लगाया जा सकता है कि उक्त व्यक्ति के परिवार को कब और कहां कैंसर बन सकता है। कैंसर के शुरूआती स्टेज पर पकड़ने जाने से उसका उपचार समय पर हो सकता है, जिससे मरीज गंभीर होने से बच सकता है। 

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ऐसी जेनेटिक जांच की जागरूकता के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के प्रसुति एवं स्त्री रोग विभाग ने कार्यक्रम का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम के संबंध में एम्स के गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीरजा भाटला ने बताया कि अनुवांशिक कैंसर एक व्यक्ति को दो या इससे अधिक अंगों में हो सकता है। महिलाओं में छाती, गर्भाशय, आंत, अंडाशय में कैंसर के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। ऐसे में जेनेटिक जांच से पता लगाया जा सकता है कि उक्त कैंसर मरीज के परिवार में किसी अन्य को कैंसर होने की आशंका कितनी है। यदि परिवार में कैंसर होने की आशंका दिखती है तो दवाओं व सर्जरी से 95 फीसदी कैंसर को होने से पहले रोका जा सकता है। 

देश में कैंसर के 15 लाख मामले 
देश में कैंसर के 15 लाख से अधिक मामले हैं। इनमें से आधी संख्या महिलाओं की है। इस संबंध में डॉक्टर एस वीएस देव ने बताया महिलाओं को स्तन, ओवरी व यूट्रस कैंसर का एक कारण अनुवांशिक होता है। इन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की बेटियों की जेनेटिक जांच कर कैंसर होने की संभावना का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी में जेनेटिक कैंसर नहीं होता। 
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कैंसर होने से पहले निकाल सकते हैं अंग 
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के विभाग प्रमुख प्रोफेसर एसवीएस देव ने कहा कि जांच के बाद पता चल चल जाता है कि शरीर के किस अंग में कैंसर हो सकता है। उसे पहले ही निकाल देने से गंभीर होने वाले कैंसर को रोका जा सकता है। एम्स में यह 2015 से शुरू हुआ और 40 केस यहां किए जा चुके हैं। इनमें कम उम्र की महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्तन निकालने के बाद प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से आकार बना दिया जाता है। वहीं डॉ. नीना मल्होत्रा ने बताया कि कैंसर की दवाइयां लेने से महिला व पुरुष में प्रजनन क्षमता घट जाती है। ऐसे में मरीजों के लिए टेस्ट टयूब बेबी की सुविधा है। पिछले चार सालों में ऐसे 30 मरीजों का उपचार किया गया है जिसमें तीन मरीज माता भी बन चुकी हैं। 
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