बजट पास होने में डीएमसी एक्ट के टूटे नियम
डीएमसी एक्ट 1957 के मुताबिक निगम बजट की प्रक्रिया नवम्बर से शुरू हो जाती है। स्थायी समितियों, क्षेत्रीय वार्ड समितियों से चर्चा के बाद बजट प्रस्तावों को सदन में चर्चा के लिए लाया जाता है। लेकिन इस बार निगम में चुनी हुई सरकार नहीं थी, इसलिए डीएमसी एक्ट के नियम धरे रह गए। इसबार के बजट प्रस्तावों को निगम अधिकारियों ने ही तैयार किया है। मंगलवार को इस बजट को सदन में औपचारिक रूप से पास होना है।
बजट से पहले निगम सचिव को सेवानिवृत्ति
बजट से एक दिन पहले निगम सचिव भगवान सिंह को सेवानिवृत्ति दे दी गई। स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव के दौरान भगवान सिंह भाजपा और आप पार्टी के बीच विवादों में घिर गए थे। उन्होंने चुनाव को शांतिपूर्वक पूरा कराने का कई असफल प्रयास किया। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी ने तो उन्हें भाजपा का एजेंट तक करार दे दिया था। जून तक वो एक्सटेंशन पर काम कर रहे थे, लेकिन निगमायुक्त ने सोमवार को ही उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी। सिविक सेंटर सूत्रों की मानें तो मेयर शैली ओबरॉय नहीं चाहती थीं, कि बजट मीटिंग के दौरान भगवान सिंह फिर से उनके बगल की कुर्सी पर बैठें, बैठक में आप पार्टी ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव भी लाने की तैयारी की थी।
नए निगम सचिव के नाम की घोषणा होना बाकी
नए निगम सचिव के नाम की घोषणा होना अभी बाकी है। मौजूदा समय शिवा प्रसाद केवी, ओएसडी मेयर, राकेश कुमार, संयुक्त कर निर्धारक या प्रवीण कुमार सचान एडीसी हेडक्वार्टर के नाम की सिविक सेंटर में चर्चा है। बजट मीटिंग से पहले नए सचिव के नाम की घोषणा होने की संभावना है।
अप्रैल के आखिरी हफ्ते में होगा नए मेयर का चुनाव
अप्रैल के आखिरी हफ्ते में नए मेयर का चुनाव होने की पूरी संभावना है। लेकिन स्थायी समिति का चुनाव कबतक होगा इसपर अभी भी असमंजस की स्थिति है। ये मामला कोर्ट में है और 24 अप्रैल को इसपर सुनवाई होनी है। अब कोर्ट के फैसले के बाद ही इसपर कोई निर्णय हो सकता है। बिना स्थायी समिति गठन के आगामी वित्त वर्ष में भी एमसीडी का अधूरा स्वरूप ही मिलेगा। लेकिन इस तरह से दिल्ली वासियों का सीधा नुकसान है। क्योंकि बिना स्थायी समिति के निगम के वित्तीय व नीतिगत फैसले नहीं हो पाएंगे।