फरीदाबाद के बीके अस्पताल के 108 ठेका कर्मचारी सोमवार को हड़ताल पर चले गए। इसका असर अस्पताल में हर ओर देखने को मिला। हर वार्ड में गंदगी फैली हुई थी, जिससे मरीजों को परेशानी हुई।
तीन माह से वेतन नहीं मिलने से नाराज कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में प्रबंधन, स्वास्थ्य अधिकारियों एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
हड़ताल के चलते बीके अस्पताल में ईसीजी एवं खून जांच नहीं हुई। पट्टियां, इंजेक्शन समेत अन्य सर्जिकल कचरा अस्पताल में इधर-उधर बिखरा रहा। सफाई व्यवस्था भी चरमराई रही। मरीजों के बिस्तरों की चादरें नहीं बदली गईं।
इसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने शिफ्ट में काम करने वाले 12 नियमित कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुला लिया। यह विकल्प भी मरीजों को अधिक राहत नहीं दे पाया।
अधिकारियों ने हड़ताली कर्मचारियों को वापस काम पर लौटने के लिए समझाया। लेकिन कर्मचारियों के गुस्से के आगे अधिकारियों की एक नहीं चली। स्वास्थ्य कर्मी नेता आशा शर्मा ने बताया कि जिस निजी ठेकेदार द्वारा इन कर्मचारियों को अस्पताल में रखा गया था, वह कोई न कोई बहाना बनाकर कर्मचारियों को उनके वेतन नहीं दे रहा है।
बीके और एम्स बल्लभगढ़ में ठनी
एक्स-रे जांच को लेकर बीके अस्पताल और बल्लभगढ़ स्थित एम्स अस्पताल में ठन गई है। मंगलवार से रेफर मरीजों को बीके अस्पताल प्रबंधन वापस भेजेगा। एम्स अस्पताल में कुछ समय पूर्व एक्स-रे के लिए डिजिटल मशीन लगाई गई है, जिसके लिए मरीज को 30 रुपये देने पड़ते हैं। पीएमओ डॉ. किशन कुमार ने बताया कि सभी डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एम्स में संबंधित डॉक्टर से रेफर मरीज आने पर संपर्क करें। पूछें कि उन्होंने मरीज को एक्सरे के लिए यहां क्यों रेफर किया।