2013 और 2015 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर गौर करें तो कांग्रेस का वोट प्रतिशत काफी रफ्तार से नीचे गिरा, जबकि भाजपा ने 2013 के चुनाव में 3.4 फीसदी वोट का गोता खाने के बाद 2015 के चुनाव में अपने वोट बैंक को संभाला। 2013 की तुलना में 2015 के चुनाव में भाजपा को 0.8 फीसदी वोट का ही नुकसान हुआ था।
आप की एंटी ने कांग्रेस-भाजपऱ दोनों को दी चोट
1993 से 2008 तक के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर थी, लेकिन 2013 में आप की एंट्री ने दोनों पार्टी को झटका दिया। कांग्रेस को 15.7 तो भाजपा को 3.4 फीसदी वोट का नुकसान उठाना पड़ा, जबकि पहली बार चुनाव लड़ने वाली आप को 29.5 फीसदी वोट मिले। 2015 के चुनाव में आप को 24.86 फीसदी वोट का और फायदा हुआ और उसका मत प्रतिशत 54.30 फीसदी पर पहुंचा, जबकि कांग्रेस को इस चुनाव में भी 14.9 फीसदी वोट का झटका लगा।
चुनाव भाजपा कांग्रेस आप
1993 42.82 34.48 ---
1998 34.02 47.76 ---
2003 35.22 48.13 ---
2008 36.34 40.31 ---
2013 33.00 24.06 29.5
2015 32.30 09.07 54.30
नोट : आंकडे़ चुनाव आयोग के अनुसार, फीसदी में
सभी पार्टियों के लिए अलग-अलग चुनौती
दिल्ली के आठवें विधानसभा चुनाव के लिए 8 फरवरी को मतदान होगा। ये कहना गलत नहीं कि तीनों ही पार्टियां आप, कांग्रेस और भाजपा के आगे चुनौतियां भी अलग-अलग हैं, जहां भाजपा को एक बार फिर अपना वोट प्रतिशत 40 फीसदी पार लेकर जाने की चुनौती है तो वहीं कांग्रेस के आगे अपने खोए जनसमर्थन को वापस पाने की। आप के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती बीते दो चुनावों में जुटाए समर्थन को बरकरार रखने की है।
दिल्ली चुनाव में तीनों दलों की हैं अपनी चुनौतियां
नई दिल्ली। 1993 विधानसभा चुनाव के बाद के सभी विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत तकरीबन एक सा रहा है। दिल्ली में मध्यम वर्ग, वैश्य व पंजाबी समुदाय के मतदाता भाजपा के कोर वोटर हैं, जबकि कांग्रेस की पैठ निम्र मध्यम वर्ग, निमभन वर्ग, मुस्लिम व पूर्वांचलियों के बीच मजबूत थी, लेकिन आप के आने के बाद कांग्रेसी वोटर पूरी तरह उसके पाले में आ गया। आज भाजपा की चुनौती यही है कि वह अपने कोर वोटर का विस्तार करे, जबकि आम आदमी पार्टी कांग्रेस से शिफ्ट हुए वोट बैंक को छिटकने न दे। इसके लिए कांग्रेस जोर आजमाइश कर रही है।
-आनंद प्रधान, राजनीतिक विश्लेषक