बुधवार को भाजपा विधायकों ने प्रेस कान्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार के मंत्रियों से सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री ने जेल से कितने फैसले लिए, इसके अलावा उन्होंने कितनी कैबिनेट की बैठक की है।
भाजपा विधायकों की तरफ से दिल्ली सरकार को भंग करने के लिए राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन और राष्ट्रपति सचिवालय की तरफ से इस मसले को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे जाने के बाद दिल्ली में सियासी घमासान मच गया है। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री जेल में हैं। दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था ठप है। दिल्ली सरकार बार-बार संविधान का उल्लंघन कर रही है। लिहाजा सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए।
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बुधवार को भाजपा विधायकों ने प्रेस कान्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार के मंत्रियों से सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री ने जेल से कितने फैसले लिए, इसके अलावा उन्होंने कितनी कैबिनेट की बैठक की है। अधिकारियों के तबादला करने वाली कमेटी कितनी बैठक हुई। छटे दिल्ली वित्त आयोग गठन क्यों नहीं किया। आम आदमी पार्टी एमसीडी की स्थाई समिति का गठन क्यों नहीं करा रही है। कैग की 11 रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर क्यों नहीं रखी जा रही है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को दिल्ली में क्यों नहीं लागू किया जा रहा है।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता की अगुवाई में भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने 30 अगस्त को राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। भाजपा नेताओं ने राष्ट्रपति को बताया था कि दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था पंगु हो गई है। अभी तक छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन नहीं हुआ है। वहीं, सीएजी की 11 रिपोर्ट को सदन में नहीं रखी गई है। इसके साथ केंद्र सरकार की योजनाओं को जानबूझकर लागू नहीं किया गया है। मांग थी कि संविधान के लगातार उल्लंघन को देखते हुए दिल्ली सरकार को बर्खास्त करना चाहिए।